मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने बड़ा सैन्य कदम उठाते हुए करीब 2,500 मरीन सैनिकों की तैनाती की घोषणा की है। यह तैनाती ईरान के साथ चल रहे संघर्ष और फारस की खाड़ी में जहाजों तथा ऊर्जा ढांचे पर बढ़ते हमलों के खतरे को देखते हुए की जा रही है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार यह कदम क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने और वैश्विक तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और अमेरिकी सेना हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक तैनात किए जा रहे सैनिक मुख्य रूप से जापान में स्थित 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट से जुड़े हैं। इस यूनिट में तीन एम्फीबियस जहाज शामिल हैं, जिनमें प्रमुख रूप से USS Tripoli (LHA‑7) भी शामिल है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत कार्रवाई
अमेरिकी सेना की यह तैनाती “Operation Epic Fury” के तहत की जा रही है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते खतरों का जवाब देना और ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना बताया जा रहा है। यह अभियान डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
B-2 स्टील्थ बमवर्षकों से हमले
अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान ने पुष्टि की है कि B‑2 Spirit stealth bomber विमानों ने ईरान के अंदर गहरे लक्ष्यों पर हमले किए हैं। इन हमलों का लक्ष्य ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल ठिकाने, मिसाइल उत्पादन केंद्र और नौसेना क्षमताओं को नुकसान पहुंचाना था ताकि भविष्य में उनके पुनर्निर्माण की संभावना कम हो सके।
तेहरान में विस्फोट
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार राजधानी तेहरान में कुद्स दिवस के दौरान एक बड़े चौक पर जोरदार विस्फोट हुआ। उस समय हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे थे और इजराइल व अमेरिका के खिलाफ नारे लगा रहे थे।
लेबनान और ईरान में बढ़ी मौतें
लेबनान में हुए इजरायल के हमलों में अब तक 773 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें 100 से अधिक बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं ईरान का दावा है कि उसके देश में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल ने केवल 12 मौतों की पुष्टि की है।
इराक में अमेरिकी विमान हादसा
इसी बीच पश्चिमी इराक में अमेरिकी सेना का KC‑135 Stratotanker टैंकर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 6 अमेरिकी चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिकी मौतों की संख्या बढ़कर कम से कम 13 हो गई है।
