नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां इसका असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और आर्थिक स्थिरता पर भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में Israel द्वारा Iran के सबसे बड़े गैस भंडार South Pars Gas Field पर किए गए हमले को इस संघर्ष का अब तक का सबसे संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाला कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि ईरान की आर्थिक रीढ़ और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। इससे वैश्विक गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार
Persian Gulf में स्थित South Pars Gas Field दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है। यह गैस क्षेत्र Iran और Qatar के बीच साझा है।
करीब 9,700 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र न केवल भौगोलिक रूप से विशाल है, बल्कि ईरान की ऊर्जा व्यवस्था का केंद्रीय स्तंभ भी है। अकेले यह गैस फील्ड ही ईरान के कुल गैस उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत उपलब्ध कराता है।
वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के रणनीतिक ऊर्जा केंद्र पर हमला वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यदि इस क्षेत्र में उत्पादन प्रभावित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में तेजी आ सकती है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता यह टकराव अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी गहराई से पड़ सकता है।
