रायपुर 7 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ में आज से नया धर्म स्वतंत्रता कानून लागू हो गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू हुए इस कानून के तहत अवैध तरीके से धर्मांतरण के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। अब बल, लालच, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराने पर दोषियों को 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना भरना होगा।
अगर पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति या पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए जुर्माना किया गया है। वहीं सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा ऐसे अपराध में दोषी पाए जाने पर सीधे उम्रकैद हो सकती है।
नए कानून के तहत धर्म परिवर्तन करने से पहले संबंधित व्यक्ति को 60 दिन पहले कलेक्टर को आवेदन देना अनिवार्य होगा। साथ ही अनुष्ठान कराने वाले पुजारी, मौलवी या पादरी को भी पूर्व सूचना देनी होगी। नियमों का पालन नहीं करने पर इसे अवैध धर्मांतरण माना जाएगा और तत्काल गिरफ्तारी हो सकती है।
शादी के लिए धर्मांतरण, तो शादी अवैध
कानून में ‘लव जिहाद’ जैसे मामलों को रोकने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से की गई शादी को शून्य घोषित किया जा सकेगा। इसके अलावा विदेशी फंडिंग और संस्थाओं की भूमिका पर भी सख्ती बरती जाएगी।
विशेष अदालतों का होगा गठन
हर जिले में विशेष अदालतें गठित होंगी, जहां 6 महीने के भीतर मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का दावा है कि इससे कानून व्यवस्था मजबूत होगी और विवादित क्षेत्रों में तनाव कम होगा, जबकि विपक्ष ने इस कानून का विरोध जताया है।
विदेशी फंडिंग और संस्थाओं पर शिकंजा
धर्मांतरण के खेल में शामिल विदेशी फंडिंग पर सरकार ने पूरी तरह रोक लगा दी है। कोई संस्था प्रलोभन या सामूहिक धर्मांतरण में शामिल पाई गई, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द होगा और उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
