नई दिल्ली। महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लाया गया नारी शक्ति वंदन बिल लोकसभा में पास नहीं हो सका। संविधान संशोधन से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक को जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण सदन में ही गिर गया।
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया। इनमें से 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट डाले। हालांकि साधारण बहुमत बिल के पक्ष में रहा, लेकिन संविधान संशोधन के लिए आवश्यक विशेष बहुमत (दो-तिहाई) हासिल नहीं हो सका।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने परिणाम घोषित करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव अनुच्छेद 368 के तहत पास नहीं हुआ, क्योंकि इसे सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत दोनों की आवश्यकता थी, जो पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में इस विधेयक पर आगे कोई कार्यवाही नहीं होगी।
❓ क्या था बिल का उद्देश्य?
सरकार इस पहल के तहत महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए तीन अहम कानून लाना चाहती थी:
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
- परिसीमन विधेयक, 2026
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
इन सभी का मुख्य उद्देश्य संसद, राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करना था। साथ ही, परिसीमन (Delimitation) के जरिए सीटों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया से भी इसे जोड़ा गया था।
📊 क्यों नहीं पास हो पाया बिल?
लोकसभा में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन के पास करीब 293 सीटें हैं। लेकिन संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए कम से कम 368 वोट (दो-तिहाई बहुमत) की जरूरत थी, जो गठबंधन जुटाने में असफल रहा।
🚫 अब आगे क्या?
यह विधेयक लोकसभा में ही असफल हो चुका है, इसलिए अब इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया जाएगा। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार, किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों से विशेष बहुमत से पास होना जरूरी होता है। एक भी सदन में असफल होने पर बिल स्वतः निरस्त माना जाता है।
