कॉमर्शियल LPG पर सभी पाबंदियां खत्म, अब मिलेगी 100% सप्लाई

नई दिल्ली 26 जून 2026 : केंद्र सरकार ने एलपीजी आपूर्ति को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों पर लगी सभी सेक्टर आधारित पाबंदियां हटा दी हैं। इसके साथ ही राज्यों को पहले की तरह 100 फीसदी कॉमर्शियल गैस सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। गैस संकट के दौरान होटलों, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीमित मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही थी, लेकिन अब हालात में सुधार के बाद यह व्यवस्था सामान्य की जा रही है। सरकार के इस फैसले से व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि देश में एलपीजी की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर हुई है। घरेलू उत्पादन बढ़ने और विदेशों से आयातित एलपीजी कार्गो के आने की संभावना को देखते हुए कॉमर्शियल सप्लाई पर लगी सभी सीमाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा, गैस संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोक दी गई बल्क एलपीजी सप्लाई को भी आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। अब बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को संकट से पहले की खपत के स्तर का 50 प्रतिशत तक बल्क एलपीजी उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से होटल, रेस्तरां, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को राहत मिलेगी। पिछले कुछ महीनों से गैस की सीमित उपलब्धता के कारण कई उद्योगों को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ रहा था। अब सप्लाई सामान्य होने से उत्पादन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, सप्लाई चेन में सुधार के बाद सी-3 और सी-4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स के डायवर्जन को भी कम किया जाएगा। इससे पेट्रोकेमिकल और डाउनस्ट्रीम उद्योगों को उनका पुराना आवंटन फिर से मिलने लगेगा। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी वजह से रोजाना कम से कम 40 हजार टन घरेलू एलपीजी उत्पादन बनाए रखने का लक्ष्य तय किया गया है।

दरअसल, पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दिया था। क्षेत्र में संघर्ष और समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता के कारण एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई बाधाओं का असर देश की आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ा। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने शुरुआत में घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को प्राथमिकता दी और व्यावसायिक क्षेत्र के लिए गैस आपूर्ति में कटौती की थी। गैस संकट के दौरान कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। कारोबारियों का कहना था कि बढ़ती कीमतों और सीमित उपलब्धता के कारण होटल और रेस्तरां उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। कई छोटे व्यवसायों को परिचालन लागत बढ़ने की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अब सरकार के ताजा फैसले से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि कीमतों में स्थायी कमी अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी।

भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी आयातकों में शामिल है और देश की कुल जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। ऐसे में वैश्विक हालात सामान्य होने पर ही घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल विदेशी आपूर्ति बेहतर होने के संकेत मिले हैं, जिससे सरकार ने प्रतिबंधों में ढील देने का निर्णय लिया है। ‘प्री-क्राइसिस लेवल’ का मतलब उस समय की खपत से है जब गैस संकट शुरू नहीं हुआ था। संकट के दौरान राज्यों और उद्योगों को सीमित मात्रा में गैस उपलब्ध कराई जा रही थी, ताकि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो। अब धीरे-धीरे उसी स्तर की ओर वापसी की जा रही है। सरकार का कहना है कि अगर आपूर्ति की स्थिति लगातार बेहतर बनी रहती है तो आने वाले समय में उद्योगों को और अधिक राहत दी जा सकती है।