रायपुर 09 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपये के शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों की जांच ने एक नया मोड़ ले लिया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल अचानक बुधवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के कार्यालय पहुंचे, जिससे सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है.
लंबे समय से सार्वजनिक मंचों से दूर और जांच एजेंसियों की नजरों में चल रहे रामगोपाल करीब तीन साल के लंबे अंतराल के बाद पहली बार इस तरह सबके सामने आए हैं.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी ने हाल ही में उन्हें कस्टम मिलिंग मामले में पूछताछ के लिए एक नोटिस जारी किया था, जिसके बाद वे खुद EOW दफ्तर में हाजिर हुए. दिलचस्प बात यह है कि इस बड़े घटनाक्रम से ठीक एक दिन पहले मंगलवार को EOW ने उनके बेटे वैभव अग्रवाल को भी तलब किया था और उनसे कई घंटों तक तीखे सवाल-जवाब किए गए थे. पिता-पुत्र से लगातार हो रही यह पूछताछ राज्य के इस बहुचर्चित मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW द्वारा की जा रही जांच के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल का नाम राज्य के तीन सबसे बड़े आर्थिक घोटालों से जुड़ा हुआ है. इसमें सबसे पहला मामला धान मिलिंग (कस्टम मिलिंग) का है, जहां आरोप है कि साल 2015 से 2023 के बीच नियमों को ताक पर रखकर चुनिंदा राइस मिलर्स को गलत तरीके से प्रोत्साहन राशि बांटी गई, जिससे सरकारी खजाने को करीब 127 करोड़ रुपये का चूना लगा.
इसके अलावा, साल 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन के नाम पर कारोबारियों से प्रति टन अवैध वसूली का एक बड़ा नेटवर्क चलाया गया, जिसमें लगभग 540 करोड़ रुपये की कोल लेवी वसूली का आरोप है. वहीं, 2019 से 2022 के दौरान सरकारी शराब व्यवस्था में एक रसूखदार सिंडिकेट बनाकर करीब 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले को अंजाम देने का दावा भी जांच एजेंसियां कर रही हैं. फिलहाल, इन सभी संगीन आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है और एजेंसियां सबूत जुटाने के लिए पूछताछ का दायरा बढ़ा रही हैं.
