खुशखबरी! जल्द सस्ते हो सकते हैं स्मार्टफोन और लैपटॉप

नई दिल्ली 10 जुलाई 2026 : अगर आप  स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी या फिर लैपटॉप खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके लिए गुड न्यूज है। अब आप इन गैजेट्स समेत दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को सस्ती कीमत में खरीद पाएंगे। दरअसल केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई पार्ट्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को हटा दिया है। इस वजह से अब स्मार्ट टीवी, स्मार्टवॉच या स्मार्टबैंड समेत कई सारे गैजेट्स आने वाले समय में सस्ते हो सकते हैं।

भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार लगातार नए नए कदम उठा रही है। अब सरकार ने बेसिक कस्टम ड्यूटी हटाकर देशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। कस्टम ड्यूटी हटने से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा और लागत कम होने की भी उम्मीद है। सरकार के इस फैसले से Apple और Xiaomi, Redmi, Realme जैसी कई सारी ग्लोबल कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

मार्च 2029 तक लागू रहेगी छूट

सरकार ने स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स के कुछ जरूरी कंपोनेंट्स पर लगने वाली 7.5% और 5% इंपोर्ट ड्यूटी को हटा दिया है। बेसिक कस्टम ड्यूटी में मिलने वाली यह राहत 31 मार्च, 2029 तक लागू रहेगी। मतलब जहां टेक कंपनियों को टैक्स में राहत मिलेगी वहीं खरीदारों की जेब से भी बोझ कम होगा।

वित्त मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी करते हुए लिथियम-आयन बैटरी सेल बनाने में काम आने वाली कई अहम मशीनों और उपकरणों को कस्टम ड्यूटी से राहत देने का फैसला किया है। इस सूची में पाउडर ड्रायर, ऑटोमैटिक फीडिंग और मिक्सिंग सिस्टम, स्लरी ट्रांसफर सिस्टम, कैथोड और एनोड कोटिंग मशीन, हाई वैक्यूम पंप, वाइंडिंग और कटिंग मशीन, टेस्टिंग मशीन, ऑटो पैकिंग सिस्टम, स्टैकिंग मशीन, वेल्डिंग मशीन समेत कई आधुनिक उपकरण शामिल हैं।

इसके साथ ही, डिस्प्ले असेंबली और इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले जरूरी पार्ट्स पर भी अब कस्टम ड्यूटी नहीं देनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और उत्पादन लागत कम होने में मदद मिल सकती है।

क्या है बेसिक कस्टम ड्यूटी?

बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) वह टैक्स है, जो भारत में विदेश से आने वाले सामान पर लगाया जाता है। जब कोई प्रोडक्ट दूसरे देश से इंपोर्ट होता है, तो सरकार उसकी कुल इंपोर्ट वैल्यू के आधार पर यह टैक्स वसूलती है। इस वैल्यू में सामान की कीमत के साथ-साथ उसका भाड़ा और इंश्योरेंस का खर्च भी शामिल होता है। किसी प्रोडक्ट पर कितनी कस्टम ड्यूटी लगेगी, यह उसकी कैटेगरी, एचएसएन (HS) कोड और वह किस देश से भारत आ रहा है, इन बातों पर निर्भर करता है।