बिलासपुर 29 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा वितरण घोटाले की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंचती नजर आ रही है। मामले की जांच कर रही सरकंडा पुलिस ने सात वर्तमान और पूर्व तहसीलदारों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया है। हालांकि तय तारीख पर नोटिस मिलने के बावजूद कोई भी अधिकारी बयान दर्ज कराने पुलिस के सामने उपस्थित नहीं हुआ। इससे जांच एजेंसी अब आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है।
सात अधिकारियों को भेजा गया नोटिस
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सर्पदंश मुआवजा वितरण से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के दौरान कई प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। इसी कड़ी में सात वर्तमान और पूर्व तहसीलदारों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
जांच अधिकारियों का मानना है कि मुआवजा स्वीकृति, दस्तावेजों के सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी इन अधिकारियों के बयान से मिल सकती है।
बयान दर्ज कराने नहीं पहुंचे अधिकारी
नोटिस जारी होने के बावजूद कोई भी अधिकारी निर्धारित समय पर सरकंडा थाने नहीं पहुंचा। इससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति का कारण क्या है और क्या उन्हें दोबारा नोटिस जारी किया जाएगा या फिर कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
क्या है सर्पदंश मुआवजा घोटाला?
सर्पदंश से मौत या गंभीर रूप से प्रभावित लोगों के परिजनों को शासन की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। आरोप है कि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों, गलत प्रमाण-पत्रों और संदिग्ध स्वीकृतियों के आधार पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। प्रारंभिक जांच में कई मामलों में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान राजस्व विभाग से जुड़े कई दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
दस्तावेजों और रिकॉर्ड की हो रही पड़ताल
पुलिस और जांच टीम मुआवजा स्वीकृति से संबंधित फाइलों, आदेशों, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि किन मामलों में नियमों का पालन किया गया और किन मामलों में कथित अनियमितताएं हुईं।
जरूरत पड़ने पर संबंधित कर्मचारियों, अधिकारियों और लाभार्थियों से भी पूछताछ की जा सकती है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
