रायपुर 03 अगस्त 2026 : छत्तीसगढ़ के करीब 1.60 लाख स्थानीय निकाय (एलबी) शिक्षकों को पेंशन और सेवा लाभों के मामले में बड़ा झटका लगा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 जुलाई 2018 से पहले की सेवा अवधि को सरकारी सेवा के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी। विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जिन एलबी शिक्षकों का संविलियन 1 जुलाई 2018 से शिक्षा विभाग में हुआ है, उनकी ओर से पूर्व सेवा को सरकारी सेवा में जोड़ने संबंधी प्रस्तुत आवेदन अमान्य माने जाएंगे।
प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना का लाभ नहीं
जारी आदेश के अनुसार, एलबी शिक्षकों को उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से सेवा गणना का लाभ नहीं मिलेगा। यानी संविलियन से पहले स्थानीय निकायों के तहत की गई सेवा को पेंशन, सेवा अवधि अथवा अन्य सरकारी लाभों की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। विभाग ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सेवा गणना निर्धारित नियमों के अनुसार ही की जाएगी।
पेंशन और अन्य दावों पर भी स्पष्ट रुख
स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश में कहा है कि 1 जुलाई 2018 से पहले की सेवा अवधि के आधार पर पेंशन निर्धारण, वरिष्ठता, सेवा लाभ अथवा अन्य वित्तीय सुविधाओं का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग ने ऐसे सभी आवेदनों को नियमानुसार निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में प्रभावित शिक्षकों में निराशा देखी जा रही है।
शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी
सरकारी आदेश सामने आने के बाद एलबी शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि उन्होंने संविलियन से पहले भी वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था में सेवाएं दी हैं, इसलिए उस अवधि को भी सेवा गणना में शामिल किया जाना चाहिए। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे इस मुद्दे पर सरकार से पुनर्विचार की मांग करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर आगे की रणनीति भी तय करेंगे।
सरकार ने नियमों का दिया हवाला
विभाग का कहना है कि यह निर्णय प्रचलित सेवा नियमों और संविलियन संबंधी प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है। आदेश का उद्देश्य सभी मामलों में एक समान प्रक्रिया अपनाना और नियमों के अनुसार सेवा लाभ निर्धारित करना है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे प्रकरणों का निस्तारण जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर किया जाए।
