नई दिल्ली 05 अगस्त 2026 : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को दिल्ली स्थित 10 जनपथ में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए। एक छात्रा ने दावा किया कि “भारत माता की जय” का नारा लगाने पर उसे देशद्रोही कहा गया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद बल प्रयोग किया गया। वहीं राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
राहुल गांधी ने सरकार पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में नागरिकों और छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को विरोध की आवाज को दबाने के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
छात्रा ने सुनाई अपनी आपबीती
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद एक छात्रा ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रा के अनुसार, वह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रही थी और “भारत माता की जय” के नारे लगा रही थी, लेकिन इसके बावजूद उसे कथित रूप से देशद्रोही कहा गया और मारपीट की गई।
अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी-अपनी बातें साझा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
20 जुलाई के प्रदर्शन का किया जिक्र
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप सामने आए थे। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की कार्रवाई हुई है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
राहुल गांधी की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा का विषय बन सकता है।
