नई दिल्ली 13 अगस्त 2026 : भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग के नियमों को कड़ा कर दिया है। इसका असर पान मसाला बनाने वाली कंपनियों से लेकर खुदरा दुकानदारों एवं ग्राहकों तक पड़ सकता है। नया नियम सोमवार, 10 अगस्त 2026 से लागू हो चुका है। नए नियम के तहत पान मसाला की पैकेजिंग में अब पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपिलीन, पॉलीएस्टर, PVC या अन्य सिंथेटिक पॉलिमर, को-पॉलिमर अथवा लैमिनेट नहीं किए जाने का सीधा आदेश दिया गया है। साथ ही एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर भी शामिल नहीं हो सकती।
अब प्लास्टिक बंद, कागज के पैकेट में आएंगे पान मसाले
एफएसएसआई ने पान पैकेजिंग में जिन वस्तुओं के उपयोग की अनुमति दी है, वो हैं- कागज, पेपर बोर्ड, सेलूलोज और अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री। नया नियम कहता है कि पान मसाला को टिन या कांच के डिब्बों में भी पैक किया जा सकता है। यानी, बहुत जल्द आपको पान मसाला अभी की पैकेजिंग में नहीं मिलेगा। आपने अपने पान मसाला का अच्छा-खासा कोटा खरीद रखा है तो संभव है कि अगली बार जब आप दुकान पर जाएं तो वहां अलग ही पैकेजिंग में पान मसालों की लड़ियां लटकी मिलें।
पान मसाला कंपनियों की बढ़ेगी लागत?
प्राधिकरण की ओर से लागू किए गए नए नियम का सीधा असर पाना मसाला कंपनियों पर होगा क्योंकि उन्हें अपने पैकेजिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलावों की जरूरत पड़ेगी। पैकेजिंग के कच्चे माल पूरी तरह बदलने होंगे। कंपनियों को अब कागज, पेपर बोर्ड, सेलूलोज, टिन, कांच जैसे कच्चा माल की ओर बढ़ना होगा। फिर इन कच्चे माल की प्रोसेसिंग करके पैकेट तैयार करने के लिए मशीनों में बदलाव करने होंगे। इन बदलावों पर कंपनियों का बजट बढ़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो कंपनियां यह बोझ ग्राहकों पर डालेंगी।
घट सकती है पान मसाले की सेल्फ लाइफ
दूसरी तरफ, प्लास्टिक या इससे संबंधित वस्तुओं के उपयोग की मनाही और कागज आदि का पैकेट बनाने के नियम से पान मसाले की सुरक्षा घटेगी। नए पैकेट्स में पान मसाले की सेल्फ लाइफ घटने की पूरी आशंका रहेगी। साथ ही, एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के दौरान भी माल की बर्बादी का खतरा बढ़ेगा। ऐसे में कंपनियों को चौतरफा मार झेलनी पड़ेगी जिसका पूरा बोझ तो वो अकेले नहीं उठाना चाहेंगी।
क्या महंगा होंगे पान मसाले?
उधर, दुकानदारों के लिए भी पान मसाले के पैकेट्स को संभालना ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। उन पर माल जल्दी बेचने का दबाव रहेगा। सेल्फ लाइफ घटने से थोक व्यापारी और खुदरा दुकानदार, दोनों अपना भंडार कम करेंगे ताकि उनकी समय से खपत हो जाए और बर्बादी से बचा जा सके। ऐसे में खरीदारी की लागत भी बढ़ेगी क्योंकि ज्यादा मात्रा में ऑर्डर देने से भाव में नरमी आती है, ढुलाई का खर्च भी कम हो जाता है। व्यापारियों और दुकानदारों को इन दोनों मोर्चों पर झटका लग सकता है जिसका सीधा असर पान मसाला के शौकीनों पर पड़ सकता है।
