नई दिल्ली 20 अगस्त 2026 : NEET-UG और UGC-NET परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का फैसला किया है। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से प्रश्नपत्रों की जांच से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक कई स्तरों पर बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार ने करीब 600 विशेषज्ञों को हटाकर नए विशेषज्ञों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही NTA के कार्यालयों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को देने की तैयारी है।
प्रश्नपत्रों की होगी चार-स्तरीय जांच
नई व्यवस्था में परीक्षा के प्रश्नपत्रों को अंतिम रूप देने से पहले उनकी चार-स्तरीय जांच की जाएगी। इसका मकसद प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी गोपनीयता बनाए रखने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी की संभावना को कम करना है।
नई व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों के चयन और उनके काम की निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
600 विशेषज्ञों को हटाने का फैसला
NTA की परीक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव विशेषज्ञों के पैनल को लेकर किया गया है। सरकार ने करीब 600 विशेषज्ञों को हटाकर नए विशेषज्ञों को शामिल करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि नए पैनल के गठन से प्रश्नपत्र निर्माण और समीक्षा प्रक्रिया को अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के चयन में उनकी योग्यता, अनुभव और विषय विशेषज्ञता को प्राथमिकता देने की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।
CISF के जिम्मे होगी सुरक्षा
परीक्षा प्रणाली में केवल प्रश्नपत्रों की जांच ही नहीं, बल्कि NTA के कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है। इसके तहत NTA कार्यालयों की सुरक्षा CISF को सौंपने का निर्णय लिया गया है।
CISF की तैनाती से संवेदनशील परिसरों और महत्वपूर्ण परीक्षा संबंधी सामग्री की सुरक्षा को मजबूत करने की उम्मीद है। परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को भी और सख्त किया जा सकता है।
NEET-UG और UGC-NET विवाद के बाद बड़ा कदम
NEET-UG परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक और UGC-NET प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ियों के बाद NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर चिंता भी सामने आई थी।
अब केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे बदलावों का मुख्य उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा बहाल करना है।
