पेपर लीक का चौंकाने वाला खुलासा सुई से लिफाफे में छेद, वीडियो बनाकर ₹11 हजार में बेचा

रायपुर 24 अगस्त 2026 :  छत्तीसगढ़ में कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े पेपर लीक मामले ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में पेपर लीक करने का कथित तौर पर एक बेहद शातिर तरीका सामने आया है। आरोप है कि परीक्षा प्रश्नपत्र वाले सीलबंद लिफाफे को सुई से छेदकर अंदर रखे पेपर की तस्वीरें या वीडियो तैयार किए गए और इसके बाद प्रश्नपत्र को हजारों रुपये में बेच दिया गया।

सुई से लिफाफे में किया गया छेद

जांच में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, आरोपियों ने सीलबंद प्रश्नपत्र के लिफाफे को सीधे खोलने के बजाय उसमें सुई की मदद से छोटा सा छेद किया। इसके बाद इसी छेद के जरिए अंदर रखे प्रश्नपत्र को मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया गया।

इस तरीके का इस्तेमाल इसलिए किया गया ताकि लिफाफा बाहर से सीलबंद नजर आता रहे और पेपर के लीक होने का तुरंत पता न चल सके।

मोबाइल से बनाया वीडियो, फिर हुई डील

आरोप है कि प्रश्नपत्र की रिकॉर्डिंग करने के बाद उसे मोबाइल के जरिए आगे भेजा गया। इसके बाद कथित तौर पर प्रश्नपत्र को पैसे लेकर बेचने की तैयारी की गई। मामले में करीब 11 हजार रुपये में पेपर बेचने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र की रिकॉर्डिंग किस-किस व्यक्ति तक पहुंची और इसके बदले कितने लोगों से पैसे लिए गए।

प्रोफेसर समेत कई लोगों पर कार्रवाई

कृषि विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले में जांच के दौरान प्रोफेसर समेत कई लोगों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि पेपर लीक की पूरी प्रक्रिया में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।

पूछताछ के दौरान प्रश्नपत्र हासिल करने, उसका वीडियो बनाने और उसे आगे बेचने की पूरी कड़ी को खंगाला जा रहा है।

परीक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस मामले ने विश्वविद्यालयों की परीक्षा प्रणाली में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर प्रश्नपत्रों को सीलबंद लिफाफों में सुरक्षित रखा जाता है, लेकिन सुई से छेद कर अंदर की सामग्री रिकॉर्ड करने के कथित तरीके ने सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि पेपर लीक की शुरुआत कहां से हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और कथित तौर पर बेचे गए प्रश्नपत्र से कितने परीक्षार्थियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।

जांच पूरी होने के बाद ही पेपर लीक के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।