05 सितम्बर 2026 : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ( CBI ) ने सुभाष चंद्रा और अन्य लोगों के विरुद्ध एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के साथ लगभग 1,322 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।
सुभाष चंद्रा एस्सेल समूह के संस्थापक है। हाल ही में पर्सनल इनसॉल्वेंसी केस में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 22,006 करोड़ के बदले 6.25 करोड़ रुपये चुकाने का फैसला सुनाया था। इसके बाद सुभाष चंद्रा चर्चा में आए थे। हालांकि बाद में एनसीएलटी की पांच सदस्यीय बैंच ने 25 अगस्त के फैसले पर रोक लगा दी।
- LIC का आरोप है कि सुभाष चंद्रा ने साल 2018 में ‘मेसर्स वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड’ और अपनी अन्य कंपनियों के लिए लोन लिया था।
- लोन मंजूर कराने के लिए उन्होंने एक ‘नेटवर्थ सर्टिफिकेट’ जमा किया था, जिसमें उनकी व्यक्तिगत कुल संपत्ति ₹59,113 करोड़ दर्शाई गई थी।
- इस भारी-भरकम नेटवर्थ को आधार बनाकर LIC HFL ने उनकी कंपनियों को ₹1,322 करोड़ से ज्यादा का लोन दिया था।
जब एस्सेल ग्रुप की कंपनियां कर्ज नहीं चुका सकीं, तो सुभाष चंद्रा के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान चंद्रा ने कहा कि उनकी संपत्ति कभी उतनी थी ही नहीं, जितनी उन्होंने लोन लेते समय LIC HFL को बताए गए सर्टिफिकेट्स में दिखाई थी।
2024 में उनकी असली कुल नेटवर्थ सिर्फ ₹31.79 करोड़ है। उन्होंने यह भी कहा कि 2017-18 में भी उनकी संपत्ति ₹40,000 करोड़ से अधिक नहीं थी।
₹22,000 करोड़ की देनदारी के बदले सिर्फ ₹6.5 करोड़ का ऑफर
सुभाष चंद्रा की दिवालिया प्रक्रिया पहले भी विवादों में रही है। उन्होंने ₹22,000 करोड़ की देनदारी के बदले सिर्फ ₹6.5 करोड़ देकर मामला खत्म करने का प्रस्ताव दिया था, जिसे NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) की सिंगल बेंच ने मान लिया था।
इस फैसले पर भारी विवाद के बाद NCLT ने मामले की सुनवाई के लिए 5 जजों की बड़ी बेंच बनाई, जिसका चंद्रा ने विरोध किया था।
