नई दिल्ली 08 सितम्बर 2026 : हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप और व्रत किया था।
हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है और अगले दिन विधि-विधान के साथ इसका पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत खोलते समय सही विधि का पालन करना शुभ फल प्रदान करता है।
इस विधि से करें व्रत का पारण
हरतालिका तीज के अगले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए पूजा करें। पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और श्रद्धा के साथ भगवान शिव-पार्वती को प्रणाम करें।
व्रत का पारण करने से पहले जल ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान को भोग अर्पित करें और प्रसाद ग्रहण करें। कई स्थानों पर परंपरा के अनुसार पहले पूजा का प्रसाद लिया जाता है और फिर भोजन करके व्रत खोला जाता है।
पारण के समय मन में पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करनी चाहिए। अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भगवान शिव और माता पार्वती से प्रार्थना कर सकती हैं।
शिव-पार्वती की पूजा से मिलता है विशेष आशीर्वाद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है। सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जबकि कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।
व्रत के पारण के बाद अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत के पारण की परंपराएं अलग हो सकती हैं।
