डमरू के पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण की पहल: कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने लिया स्थल का जायजा, मुक्तिधाम तक सड़क निर्माण की दी तत्काल स्वीकृति

योगेश यादव/बलौदाबाजार, 20 सितम्बर 2026/बलौदाबाजार जिले के प्राचीन एवं ऐतिहासिक ग्राम डमरू को पुरातात्विक पहचान दिलाने और इसकी अनमोल धरोहरों के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने शनिवार को ग्राम डमरू पहुंचकर पुरातात्विक स्थलों और प्राचीन मंदिरों का विस्तृत अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को पुरातात्विक अवशेषों के सुव्यवस्थित संरक्षण तथा उत्खनन कार्य पुनः शुरू कराने के प्रस्ताव प्रेषित करने के निर्देश दिए। साथ ही, ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए शिव मंदिर से मुक्तिधाम तक सड़क निर्माण की तत्काल स्वीकृति प्रदान की।

*मंदिर में दर्शन और अवशेषों का निरीक्षण*

कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने भ्रमण के दौरान सबसे पहले गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर एवं महामाया मंदिर में माता का दर्शन व पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन शिलाओं तथा पुरातत्व विभाग द्वारा कमरे में सुरक्षित रखे गए पुरातात्विक अवशेषों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने इन बहुमूल्य ऐतिहासिक संपदाओं को सुरक्षित रखने के लिए विभाग को प्रस्ताव प्रेषित करने हेतु अधिकारियों को निर्देशित किया।

*उत्खनन कार्य पुन: शुरू करने पर जोर*

कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ संस्कृति एवं पुरातत्व संचालनालय द्वारा मंदिर के पास पूर्व में उत्खनित किए गए दो टीलों का भी जायजा लिया। ग्राम डमरू को एक प्रमुख प्राचीन एवं ऐतिहासिक धरोहर के रूप में स्थापित करने के लिए उन्होंने इन टीलों का उत्खनन कार्य पुनः शुरू कराने पर जोर दिया और इस संबंध में आवश्यक विभागीय पहल करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्थानीय ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर जानकारी ली और उन्हें शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान ग्रामीणों ने शिव मंदिर से मुक्तिधाम तक पहुंच मार्ग न होने की समस्या बताते हुए पक्की सड़क निर्माण की मांग रखी। ग्रामीणों की आवश्यकता को देखते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही सड़क निर्माण की स्वीकृति दी और अधिकारियों को इसका प्रक्कलन शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कलेक्टर ने गांव के मुख्य मुक्ति धाम पर निर्माणाधीन शेड निर्माण का भी जायजा लिया औऱ समय पर निर्माण पूरा करने के निर्देश दिये।

ज्ञातव्य है कि जिला मुख्यालय बलौदाबाजार से करीब 14 किलोमीटर दूर शिवनाथ नदी के तट पर स्थित ग्राम डमरू एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल है। यहाँ छत्तीसगढ़ संस्कृति एवं पुरातत्व संचालनालय द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अनुमति से डॉ. शिवकांत बाजपेयी के निर्देशन में वर्ष 2013 से 2015 के दौरान दो टीलों का उत्खनन किया गया। पुरातात्विक खुुदाई के दौरान पहली बार भगवान बुद्ध के चरणों का चिन्ह मिला। यह चिन्ह मध्य भारत में पहली बार मिला है।भगवान बुद्ध के पद चिन्ह मिलना इस बात का प्रमाण है कि पहली से पांचवीं सदी के बीच डमरू हीनयान समुदाय का प्रमुख केंद्र रहा होगा।

यहां महामाया मंदिर परिसर मे प्रस्तर निर्मित चबूतरे पर शिव मंदिर स्थित है। यह स्मारक पूर्वाभिमुखी है। यह जर्जर स्थिति में था जिसे वर्ष 2012-13 में विभाग द्वारा रिसेटिंग का कार्य कराया गया है। इसमें आमलक नहीं है और इसका गर्भगृह नदी सिर विहीन मंदिर के पीछे एवं जलधारी (योनिपीठ) मंदिर के पास रखे है। इस मंदिर के अतिरिक्त परिसर में दो लघु टीले सामने विद्यमान है। पूर्व में इस स्थल पर उत्खनित त्रिविक्रम, विष्णु, सूर्य, शिव, ब्रम्हा, मय, चामुण्डा, पार्वती, अम्बिका, चवरधारिणी की प्रतिमाएं और कुछ मिथुन प्रतिमाएं शिव मंदिर परिसर में ही नव निर्मित महामाया देवी मंदिर के भित्तीयों मे जड़ी हुई है।यह प्राचीन मंदिर कलचूरीकालीन (काल लगभग 12 शति ईस्वी ) है जो समकालीन वास्तु शिल्प एवं मूर्तिविधा का अच्छा उदाहरण है।यहां पर प्राप्त प्रतिमाएं पुरातत्वीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है।