मंदसौर 20 सितम्बर 2026 :मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापन परियोजना को एक और नई सफलता मिली है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार शाम मंदसौर और नीमच क्षेत्र में स्थित गांधीसागर वन्य अभयारण्य का दौरा किया. यहां उन्होंने कूनो राष्ट्रीय उद्यान से स्थानांतरित की गई मादा चीता सीसीबी 2 को अभयारण्य के खिमला पार्टीशन स्थित बाड़े में छोड़ा.
राधाष्टमी के पावन अवसर को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इस ढाई वर्षीय मादा चीता का नाम ‘राधा’ रखा. यह मादा चीता फरवरी 2026 में भारत लाई गई थी और इसे कूनो में रखा गया था. बाड़े से रिलीज होते ही मादा चीता ने कुछ देर इलाके का जायजा लिया और फिर जंगल की ओर निकल गई. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
गांधीसागर में अब हो गए चार चीते
मादा चीता ‘राधा’ के आने के साथ ही गांधीसागर अभयारण्य में चीतों का कुनबा बढ़कर चार हो गया है. इनमें दो नर और दो मादा चीते शामिल हैं. इससे पहले 20 अप्रैल 2025 को कूनो से दो नर चीते ‘प्रभास’ और ‘पावक’ लाए गए थे. वहीं, 17 सितंबर 2025 को मादा चीता ‘धीरा’ को यहां लाया गया था.
मादा चीता ‘राधा’ के आने के साथ ही गांधीसागर अभयारण्य में चीतों का कुनबा बढ़कर चार हो गया है. इनमें दो नर और दो मादा चीते शामिल हैं. इससे पहले 20 अप्रैल 2025 को कूनो से दो नर चीते ‘प्रभास’ और ‘पावक’ लाए गए थे. वहीं, 17 सितंबर 2025 को मादा चीता ‘धीरा’ को यहां लाया गया था.
गांधीसागर को कूनो के बाद देश में चीतों के दूसरे प्रमुख प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है. चीतों की सुरक्षा के लिए यहां करीब 64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में संरक्षित बाड़ा तैयार किया गया है. इस क्षेत्र में 24 घंटे निगरानी व्यवस्था और प्रबंधन सुविधाएं बनाई गई हैं. साथ ही वन विभाग के कर्मचारियों और वन्यजीव गाइडों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है.
पर्यटन और स्थानीय रोजगार में बढ़ोतरी
गांधीसागर अभयारण्य में चीता परियोजना के विस्तार से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बड़ी गति मिलेगी. चीतों की मौजूदगी से सैलानियों का आकर्षण बढ़ेगा. इससे मंदसौर और नीमच जिले में गाइड, होमस्टे, परिवहन और अन्य सेवाओं के जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. पर्यटकों को भी चीतों को देखने का असवर प्राप्त होगा.
गांधीसागर अभयारण्य में चीता परियोजना के विस्तार से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बड़ी गति मिलेगी. चीतों की मौजूदगी से सैलानियों का आकर्षण बढ़ेगा. इससे मंदसौर और नीमच जिले में गाइड, होमस्टे, परिवहन और अन्य सेवाओं के जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. पर्यटकों को भी चीतों को देखने का असवर प्राप्त होगा.
