छत्तीसगढ़ की पहली महिला खुली जेल रायपुर में शुरू, बंदिनियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

रायपुर 26 September 2026 : छत्तीसगढ़ में महिला बंदिनियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। रायपुर केंद्रीय जेल में प्रदेश की पहली महिला खुली जेल का शुभारंभ किया गया। डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने महिला खुली जेल का उद्घाटन किया। इस दौरान जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री, महिला ओपन जेल प्रभारी खुशबू मिश्रा सहित जेल विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

प्रदेश में पहली बार महिला खुली जेल की शुरुआत

छत्तीसगढ़ में पहली बार महिला बंदिनियों के लिए इस तरह की ओपन जेल शुरू की गई है। इसका उद्देश्य महिला बंदिनियों को पारंपरिक जेल व्यवस्था से आगे बढ़कर काम और रोजगार से जोड़ना है। इसके जरिए उन्हें आत्मनिर्भर बनने और समाज में दोबारा स्थापित होने का अवसर मिल सकेगा।

महिला खुली जेल में चयनित बंदिनियों को अपेक्षाकृत खुले वातावरण में रहने और निर्धारित नियमों के तहत विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

पहले से उपलब्ध अधोसंरचना का किया गया उपयोग

रायपुर केंद्रीय जेल में पहले से उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए महिला ओपन जेल की शुरुआत की गई है। इससे नई व्यवस्था के लिए अलग से बड़े स्तर पर अधोसंरचना विकसित करने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

जेल प्रशासन की ओर से महिला बंदिनियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। ओपन जेल की व्यवस्था निर्धारित नियमों और जेल विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत संचालित होगी।

जेल की दीवारों से बाहर काम करने का मौका

महिला ओपन जेल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पात्र महिला बंदिनियों को जेल की ऊंची दीवारों के बाहर निकलकर काम करने और रोजगार से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें कार्य का अनुभव प्राप्त करने के साथ-साथ अपनी क्षमताओं को विकसित करने का मौका मिलेगा।

काम के माध्यम से बंदिनियां अपनी दिनचर्या को अधिक व्यवस्थित कर सकेंगी और भविष्य में सामान्य जीवन में लौटने के लिए जरूरी कौशल विकसित कर सकेंगी।

पुनर्वास और आत्मनिर्भरता पर जोर

ओपन जेल की अवधारणा में बंदियों के सुधार, पुनर्वास और समाज में पुनर्स्थापन को महत्वपूर्ण माना जाता है। महिला बंदिनियों के लिए शुरू की गई यह व्यवस्था भी इसी दिशा में एक कदम है।

रोजगार से जुड़ने के अवसर मिलने से बंदिनियों को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सकती है। साथ ही, जेल से बाहर निकलने के बाद सामान्य जीवन में लौटने की तैयारी भी बेहतर तरीके से हो सकती है।