10 October 2026 : Navaratri 2026 वैदिक पंचांग के अनुसार, शक्ति की आराधना का सबसे बड़ा पर्व शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri 2026) इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू हो रहा है। इस पावन पर्व को देशभर में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। माता की कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए भक्त नौ दिनों तक उपवास (व्रत) भी रखते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के दौरान व्रत और पूजन करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। व्रत के दौरान खानपान और साफ-सफाई से जुड़े कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। आइए जानते हैं कि शारदीय नवरात्र के व्रत में किन चीजों का सेवन करना चाहिए और किन नियमों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
शारदीय नवरात्र व्रत में क्या खाएं? (क्या है सात्विक आहार)
व्रत के दौरान पूरी तरह से शुद्ध और सात्विक आहार का ही सेवन करना चाहिए:
आटा व अनाज: व्रत में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, और समा के चावल का उपयोग किया जा सकता है। इनकी पूरियां, रोटियां या अन्य व्यंजन बनाकर खाए जा सकते हैं।
फलाफल व डेयरी उत्पाद: सभी प्रकार के ताजे फल, दूध, दही, पनीर, छाछ, और लस्सी का सेवन बेहद फायदेमंद माना गया है।
विशेष व्यंजन: साबूदाने की खिचड़ी या खीर का सेवन भी व्रत में व्रतधारियों द्वारा बड़े चाव से किया जाता है।
नमक: व्रत के खानपान में साधारण नमक का प्रयोग वर्जित है; इसकी जगह केवल सेंधा नमक का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
व्रत के दौरान किन चीजों का सेवन है वर्जित?
अनाज व दालें: व्रत के दिनों में गेहूं, चावल (साधारण), मैदा और किसी भी प्रकार की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए।
तामसिक भोजन: प्याज, लहसुन, अंडा, मांस-मछली और मदिरा (शराब) का सेवन पूरी तरह से वर्जित है।
सब्जियां: व्रत में बैंगन, कटहल, मशरूम और भिंडी जैसी सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए।
व्रत और पूजा से जुड़े अन्य जरूरी नियम
बाल व नाखून काटना: शारदीय नवरात्र के पवित्र दिनों के दौरान बाल, दाढ़ी-मूंछ और नाखून काटने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से अशुभ परिणाम मिल सकते हैं और मां दुर्गा नाराज हो सकती हैं।
चमड़े की वस्तुएं: पूजा-पाठ के दौरान चमड़े से बनी किसी भी चीज (जैसे बेल्ट, पर्स आदि) का उपयोग नहीं करना चाहिए।
घर को सूना न छोड़ें: यदि आपने घर में कलश स्थापना की है या माता की अखंड ज्योति जलाई है, तो घर को कभी भी सूना या पूरी तरह खाली न छोड़ें। परिवार के किसी न किसी सदस्य का घर में होना आवश्यक माना गया है।
