राहुल गांधी का होगा छत्तीसगढ़ दौरा, तैयारियों को लेकर बढ़ी सरगर्मी

बस्तर 10 October 2026 : छत्तीसगढ़ के बस्तर एक बार फिर बोधघाट परियोजना को लेकर सियासी संग्राम छिड़ चुका है. इसके अलावा बस्तर में अवैध खनन, जंगलों की कटाई और आदिवासियों के जल जंगल जमीन का मुद्दा भी तूल पकड़ चुका है. इन सबके बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी नवंबर 2026 में बस्तर दौरे पर आ रहे हैं. उनके दौरे की तारीख तय नहीं हुई है लेकिन नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि बोधघाट परियोजना का मुद्दा राहुल गांधी उठा सकते हैं.

बोधघाट परियोजना पर कांग्रेस की कार्ययोजना बनी

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने बताया कि कांग्रेस की एक कार्य योजना बनी हुई है. मुख्य रूप से बोधघाट परियोजना जिसमें 56 गांव प्रभावित हो रहे हैं. हजारों की संख्या में घर उजड़ रहे हैं. आदिवासियों का विस्थापन हो रहा है. जिसका विरोध बस्तर में जारी है. इस विरोध में शामिल करने के लिए राहुल गांधी को बस्तर लाया जाए. ऐसा वातावरण बनाने के लिए बारसूर स्तिथ स्थल का निरीक्षण किया गया. जो बारसूर के नजदीक है. स्थल निरीक्षण के बाद छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव भगत दिल्ली वापस गए.

राहुल गांधी का बस्तर दौरा प्रस्तावित

चरणदास महंत ने बताया कि बीते दिनों छत्तीसगढ़ प्रभारी, पीसीसी अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष दिल्ली गए हुए थे. इस दौरान राहुल गांधी से मुलाकात हुई. जिस पर राहुल गांधी ने स्वयं कहा कि छत्तीसगढ़ में खनिज और कोयले का खनन जारी है, लाखों पेड़ों की कटाई हो रही है और बोधघाट परियोजना का विरोध हो रहा है. इस लिहाज से उनका दौरा कहां होना चाहिए. जिसके बाद निर्णय लिया गया कि राहुल गांधी को बस्तर लाया जाए.

बोधघाट पर पहले लड़ाई होगी. खनन करने वाले उद्योगपति और व्यापारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैं. वो अपना काम जारी रखेंगे. कम से कम बस्तर के आदिवासी बच्चों को बचाना चाहिए. इस लिहाज से राहुल गांधी को बुलाया जा रहा है. जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है. नवंबर में किसी भी तारीख को राहुल गांधी बस्तर आएंगे- चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष

बोधघाट परियोजना की जद में 56 गांव शामिल

बस्तर में लंबे समय से खनन परियोजनाओं, वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई और विकास कार्यों के कारण आदिवासी समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं. स्थानीय लोगों को चिंता है कि विकास परियोजनाओं के चलते कहीं उनकी जमीन, जंगल, आजीविका और पारंपरिक संस्कृति प्रभावित न हो. इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित परियोजना को लेकर संभावित विस्थापन, वन भूमि के डूब क्षेत्र में आने और स्थानीय आदिवासी समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं. बोधघाट परियोजना में 56 गांव पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से डूबान क्षेत्र में आने की संभावना है. जिससे 40 से 50 हजार लोग प्रभावित होंगे. लगभग 5700 क्षेत्र जंगल डूबान क्षेत्र में आने की संभावना है.