CJI Surya Kant Statement: नई दिल्ली 12 अक्टूबर 2026 : दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रस्तावित विरोध मार्च के बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने प्रदर्शन को लेकर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन यह कानून के दायरे में और निर्धारित स्थानों पर होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शनों के कारण सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और न्यायालय को प्रदर्शनों में नहीं घसीटा जाना चाहिए।
वकीलों की हिरासत और इंटरनेट बंद करने का मामला
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से वकीलों को हिरासत में लिए जाने और इंटरनेट सेवाएं निलंबित किए जाने के मुद्दे पर याचिका दाखिल की गई है। इस मामले की सुनवाई के दौरान SCBA के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच वकीलों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाया।
उन्होंने इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने पर भी चिंता जताई। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि लोकतांत्रिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलनी चाहिए, लेकिन इनके कारण न्यायालय के कामकाज पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि वकीलों, अदालत के कर्मचारियों और मुकदमों से जुड़े लोगों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए। अदालत में आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसका ध्यान रखा जाना जरूरी है।
विपक्ष के मार्च को लेकर दिल्ली में सुरक्षा सख्त
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विपक्षी दलों ने 11 अक्टूबर को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की घोषणा की थी।
प्रस्तावित प्रदर्शन में कथित वोट चोरी का मुद्दा उठाने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल है। प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 30 हजार से अधिक जवानों की तैनाती की गई है।
इससे पहले विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारियों और नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।
छह मेट्रो स्टेशन शाम 4 बजे तक बंद
प्रस्तावित विरोध मार्च को देखते हुए दिल्ली के छह मेट्रो स्टेशनों को शाम 4 बजे तक बंद रखने का फैसला लिया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अनधिकृत जमावड़े को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली की सीमाओं, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
इसके अलावा, दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों की जांच तेज कर दी गई है। होटल, गेस्ट हाउस, लॉज और धर्मशालाओं में भी सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।
दिल्ली में 120 से अधिक केंद्रीय बलों की कंपनियां तैनात
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 120 से अधिक कंपनियां तैनात की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए नई दिल्ली जिले को 20 जोन में बांटा गया है।
इन जोन में संयुक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारी हालात पर नजर रख रहे हैं। इसके साथ ही पुलिस की विभिन्न इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारी भी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों को जुटाने से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी निगरानी की जा रही है।
CJI की टिप्पणी क्यों है अहम?
दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रस्तावित मार्च और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच CJI सूर्यकांत की टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्य न्यायाधीश ने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को स्वीकार करते हुए न्यायिक संस्थानों की स्वतंत्रता और अदालत के सुचारू कामकाज को बनाए रखने पर जोर दिया है।
उनका स्पष्ट संदेश है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है, लेकिन कानून-व्यवस्था, न्यायालय के कामकाज और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
