कोलकाता 13 अक्टूबर 2026 : पश्चिम बंगाल की अदालतों में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है. राज्य की सभी अदालतों के परिसर में पान, गुटखा और सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने की पहल की गई है. कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रबींद्र वी. घुघे ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला न्यायाधीशों को पत्र लिखा है. इसके साथ ही अदालतों में प्रवेश करने वाले लोगों की मेटल डिटेक्टर से जांच करने का प्रस्ताव भी रखा गया है.
मुख्य न्यायाधीश ने सोमवार को बरुईपुर अदालत में एक वकील पर हुए हमले से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान इन प्रस्तावों की जानकारी दी. हालांकि, इन उपायों को लागू करने के संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. सुनवाई के दौरान मौजूद कुछ वकीलों ने धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबंध के विकल्प के तौर पर अदालत परिसर में अलग धूम्रपान क्षेत्र बनाने का सुझाव भी दिया.
पान-गुटखा और सिगरेट पर प्रतिबंध
कलकत्ता हाईकोर्ट में बरुईपुर अदालत में कार्यरत वकील सायन बनर्जी पर हमले के मामले की सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में प्रतिबंध का मुद्दा उठा. मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि राज्य की सभी अदालतों में पान, गुटखा और सिगरेट पर रोक लगाने के संबंध में जिला न्यायाधीशों को पत्र भेजा गया है. इस पहल का उद्देश्य अदालत परिसरों में अनुशासन और स्वच्छता बनाए रखने की दिशा में कदम उठाना है. सुनवाई के दौरान मौजूद कुछ वकीलों ने धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबंध के विकल्प के तौर पर अदालत परिसर में अलग धूम्रपान क्षेत्र बनाने का सुझाव भी दिया.
अदालतों की सुरक्षा बढ़ाने का प्रस्ताव
मुख्य न्यायाधीश ने अदालत परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया. प्रस्ताव के मुताबिक, राज्य की सभी अदालतों के प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर लगाए जा सकते हैं. इसके जरिए अदालत में प्रवेश करने वाले लोगों की जांच सुनिश्चित करने की योजना है. वकील पर हमले से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई चर्चा में यह प्रस्ताव सामने आया.
हालांकि, मेटल डिटेक्टर लगाने और सभी लोगों की जांच अनिवार्य करने के संबंध में अभी अंतिम दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं. मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा संबंधी प्रस्तावों पर आगे बढ़ने से पहले बार काउंसिल और बार एसोसिएशन को बैठक कर विचार-विमर्श करना होगा.
