शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी जाती है खीर,जानें ‘अमृत वर्षा’ का रहस्य

नई दिल्ली 21 अक्टूबर 2026 :  हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी से अमृत की वर्षा होती है। इसी विश्वास के चलते शरद पूर्णिमा की रात लोग खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं, ताकि चंद्रमा की किरणें खीर पर पड़ें और उसमें अमृत जैसा गुण आ जाए। इस परंपरा को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। आखिर शरद पूर्णिमा की रात ही खीर क्यों रखी जाती है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है?

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा के साथ चमकता है और उसकी चांदनी को विशेष गुणकारी माना जाता है।

ज्योतिषीय और धार्मिक परंपराओं में चंद्रमा को मन, शीतलता और मानसिक शांति का प्रतीक माना गया है। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्र दर्शन, पूजा-पाठ और ध्यान का विशेष महत्व बताया जाता है।

चांदनी में खीर रखने की क्या है परंपरा?

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर रात में खुले आसमान के नीचे रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक विश्वास है कि इस रात चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है और उसकी किरणों के संपर्क में आने से खीर में विशेष दिव्य गुण आ जाते हैं।

इसी मान्यता के आधार पर लोग खीर को ऐसी जगह रखते हैं, जहां चंद्रमा की रोशनी सीधे पड़ सके। अगले दिन सुबह इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में बांटा जाता है। हालांकि, अमृत वर्षा की यह धारणा धार्मिक आस्था का हिस्सा है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

शरद पूर्णिमा की रात को क्यों माना जाता है खास?

पौराणिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा का संबंध माता लक्ष्मी की पूजा से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा करती हैं। इसी वजह से कई स्थानों पर रात में जागरण और विशेष पूजा की जाती है।

इस दिन भक्त सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने की परंपराएं भी अलग हो सकती हैं।