धर्म-संस्कृति 22 अक्टूबर 2026 : सनातन परंपरा में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, ज्ञान, सद्बुद्धि और जीवन में उन्नति की कामना से पूजा-पाठ करते हैं। पीले वस्त्र पहनना, भगवान को पीले फूल अर्पित करना और जरूरतमंदों को भोजन कराना इस दिन की प्रचलित परंपराओं में शामिल है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के साथ अच्छे व्यवहार, संयम और सेवा का भी महत्व है। आइए जानते हैं गुरुवार को किए जाने वाले सरल पारंपरिक उपाय।
भगवान विष्णु की पूजा से करें शुरुआत
सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। भगवान विष्णु के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद परिवार की सुख-शांति और सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करें। पूजा में अधिक सामग्री जुटाने से ज्यादा महत्व श्रद्धा और एकाग्रता का माना जाता है।
पीले वस्त्र पहनने की परंपरा
पीला रंग देवगुरु बृहस्पति से जुड़ा माना जाता है। इसी कारण गुरुवार को पीले वस्त्र पहनने की परंपरा है। यदि पूरे पीले कपड़े उपलब्ध न हों, तो पीला दुपट्टा या रूमाल रख सकते हैं। इसे अनिवार्य नियम समझने के बजाय अपनी श्रद्धा के अनुसार अपनाएं।
इस मंत्र का करें जाप
भगवान विष्णु की उपासना में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जाता है। पूजा के बाद शांत मन से इसका स्मरण करें। अपनी सुविधा के अनुसार 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं। संख्या पूरी करने की जल्दबाजी से बचें और मन को प्रार्थना में लगाने का प्रयास करें।
चने की दाल और गुड़ का करें दान
गुरुवार को चने की दाल, गुड़, पीले फल और उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को भोजन या राशन दे सकते हैं। दान सम्मानपूर्वक करें और ऐसी वस्तुएं दें, जो सामने वाले के काम आ सकें। इसके लिए कर्ज लेना या अपनी जरूरी जरूरतों को रोकना आवश्यक नहीं है।
केले के पौधे की पूजा
कई परिवारों में गुरुवार को केले के पौधे की पूजा की जाती है। इस परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु पौधे के पास स्वच्छता रखकर जल अर्पित करते हैं और भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं। पौधे को नुकसान पहुंचाए बिना पूजा करें। दीपक जलाएं तो उसे सूखे पत्तों से दूर सुरक्षित स्थान पर रखें।
भगवान को अर्पित करें सात्विक भोग
भगवान विष्णु को अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार केला, चने की दाल-गुड़ या कोई सात्विक प्रसाद अर्पित कर सकते हैं। भोग तैयार करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें। महंगे प्रसाद या बड़ी व्यवस्था की जरूरत नहीं है।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण
गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम के पाठ और श्रवण की भी परंपरा है। समय उपलब्ध हो तो श्रद्धापूर्वक पाठ करें। पूरा पाठ संभव न हो, तो कुछ समय भगवान का नाम स्मरण करें। नियमित प्रार्थना के लिए दिन में थोड़ा समय निकालना भी अपनी आस्था से जुड़ने का सरल तरीका हो सकता है।
गुरुजनों और बुजुर्गों का करें सम्मान
देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान और मार्गदर्शन से जोड़ा जाता है। इस दिन माता-पिता, शिक्षकों और बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। किसी विद्यार्थी को किताब, कॉपी या पढ़ाई की सामग्री देना भी सेवा का अच्छा अवसर है। अपने अनुभव से किसी की सहायता करना और अच्छी बात सीखने के लिए तैयार रहना भी महत्वपूर्ण है।
गुरुवार को किन बातों का रखें ध्यान?
पूजा-पाठ के साथ अपने व्यवहार में भी संयम रखें। कटु वचन, अनावश्यक विवाद और किसी का अपमान करने से बचें। भोजन की बर्बादी न करें और दान का दिखावा न करें। व्रत अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार रखें; केवल पूजा और प्रार्थना भी कर सकते हैं।
