नई दिल्ली: 24 अक्टूबर 2026 : भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर किए गए सटीक हमलों ने भारतीय वायुसेना की ताकत और परिचालन क्षमता को प्रदर्शित किया। उनके मुताबिक, इस ऑपरेशन ने साबित किया कि भारतीय वायुसेना अपनी रणनीति, आधुनिक तकनीक और सटीक मारक क्षमता के दम पर चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों को भी निशाना बनाने में सक्षम है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, वायुसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय वायुसेना की क्षमता-केंद्रित रणनीति की महत्वपूर्ण सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान से मिले अनुभव भविष्य की सैन्य तैयारियों के लिए उपयोगी साबित होंगे। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी सैन्य सफलता के बाद रुकने के बजाय अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करना जरूरी है।
पश्चिमी मोर्चे पर 1200 किलोमीटर तक दिखाया दम
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी मोर्चे पर लगभग 1200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक सटीक हमले किए। इस कार्रवाई ने वायुसेना की मारक क्षमता और रणनीतिक तैयारी को प्रदर्शित किया।
उन्होंने कहा कि वायु शक्ति देश की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण जवाबी क्षमता होने के साथ-साथ दुश्मन को किसी भी दुस्साहस से रोकने में भी अहम भूमिका निभाती है। ऑपरेशन सिंदूर ने इस भूमिका को और मजबूत किया।
ऑपरेशन सिंदूर से मिले ये बड़े सबक
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान में सफलता हासिल करने के लिए एक ही हथियार या तकनीक पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं है। सेना के पास कई विकल्प होने चाहिए, ताकि दुश्मन की रणनीति बदलने पर तुरंत जवाब दिया जा सके।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय वायुसेना को अपनी युद्धक क्षमताओं का लगातार विस्तार करना होगा। भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर खुफिया जानकारी और विभिन्न सैन्य प्रणालियों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, आधुनिक हथियारों और बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणालियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। इस अभियान के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
यह अभियान 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद भारत की प्रमुख सीमा पार सैन्य कार्रवाइयों में से एक रहा। इस दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकी ढांचे के खिलाफ लक्षित कार्रवाई की। बाद में पाकिस्तान की ओर से की गई जवाबी गतिविधियों के बीच भारतीय वायुसेना की वायु रक्षा क्षमताओं की भी परीक्षा हुई।
स्वदेशी हथियारों ने दिखाया दम
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत में विकसित हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि कई स्वदेशी प्रणालियों ने अभियान में प्रभावी भूमिका निभाई और दुश्मन के इलाके में गहराई तक प्रहार करने की क्षमता प्रदर्शित की।
उन्होंने यह भी बताया कि अभियान की सफलता किसी एक लड़ाकू विमान या हथियार की वजह से नहीं मिली। इसके पीछे खुफिया जानकारी, सटीक निशाना साधने वाले हथियार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, नेटवर्क आधारित संचालन और वायु रक्षा प्रणालियों का संयुक्त योगदान रहा।
वायुसेना प्रमुख के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने अभियान के दौरान नागरिकों को नुकसान से बचाने के अपने संकल्प का भी पालन किया।
ड्रोन और लंबी दूरी के हथियारों को रोकने पर जोर
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की स्वदेशी नेटवर्क आधारित वायु रक्षा प्रणाली ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि इस प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए कई ड्रोनों और लंबी दूरी के हथियारों के खतरों से निपटने में मदद की।
भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय वायुसेना निगरानी एवं खुफिया क्षमताओं, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी प्रणालियों और सुरक्षित संचार नेटवर्क को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इसके साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निर्णय लेने वाली प्रणालियों को भी विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
विकसित भारत 2047 के लिए वायुसेना का क्या है लक्ष्य?
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना का दीर्घकालिक लक्ष्य विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप है। इसके तहत वायुसेना को एक ऐसी आधुनिक और बहु-क्षेत्रीय एयरोस्पेस शक्ति के रूप में विकसित करना है, जो देश के आर्थिक, तकनीकी और सामरिक हितों की रक्षा कर सके।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वदेशी रक्षा उत्पादन, उन्नत एयरोस्पेस तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियों, अंतरिक्ष क्षमताओं और साइबर सुरक्षा पर जोर दिया जा रहा है।
वायुसेना प्रमुख के अनुसार, भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए केवल आधुनिक हथियार पर्याप्त नहीं होंगे। मजबूत रक्षा उत्पादन व्यवस्था, बेहतर रखरखाव, प्रभावी लॉजिस्टिक्स और तकनीकी आत्मनिर्भरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख के आधार पर भारतीय वायुसेना अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि जरूरत पड़ने पर देश की सुरक्षा के लिए अधिक तेजी, सटीकता और प्रभावशीलता के साथ कार्रवाई की जा सके।
