*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग~🌞* *⛅दिनांक – 29 जून 2025*

*🌞~ आज का हिन्दू
पंचांग~🌞*
*⛅दिनांक – 29 जून 2025*
*⛅दिन – रविवार*
*⛅विक्रम संवत् – 2082*
*⛅अयन – उत्तरायण*
*⛅ऋतु – वर्षा*
*⛅मास – आषाढ़*
*⛅पक्ष – शुक्ल*
*⛅तिथि – चतुर्थी सुबह 09:14 तक तत्पश्चात् पञ्चमी*
*⛅नक्षत्र – अश्लेशा प्रातः 06:34 तक तत्पश्चात् मघा*
*⛅योग – वज्र शाम 05:59 तक तत्पश्चात् सिद्धि*
*⛅राहुकाल – शाम 05:48 से शाम 07:29 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय – 05:57*
*⛅सूर्यास्त – 07:29 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल – पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:33 से प्रातः 05:15 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:16 से दोपहर 01:10*
*⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:22 जून 30 से रात्रि 01:04 जून 30 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)*
*⛅विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है व पञ्चमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹बड़ (बरगद)🔹*

*🔸बवासीर, वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन, प्रमेह स्वप्नदोष आदि रोगों में बड़ का दूध अत्यंत लाभकारी है । प्रातः सूर्योदय के पूर्व वायुसेवन के लिये जाते समय २-३ बताशे साथ में ले जायें ।*

*🔸बड़ की कली को तोड़कर एक-एक बताशे में बड़ के दूध की ४-५ बूँद टपकाकर खा जायें । धीरे-धीरे बड़ के दूध की मात्रा बढ़ाते जायें । ८-१० दिन के बाद मात्रा कम करते-करते अपनी शुरूवाली मात्रा पर आ जायें । कम-से-कम चालीस दिन यह प्रयोग करे ।*

*🔸बड़ का दूध दिल, दिमाग व जिगर को शक्ति प्रदान करता है एवं मूत्र रुकावट (मूत्रकृच्छ) में भी आराम होता है । इसके सेवन से रक्तप्रदर व खूनी बवासीर का रक्तसाव बन्द होता है पैरों की एडियों में बड़ को दूध लगाने से वे नहीं फटती चोट, मोच और गठिया रोग में इसकी सूजन पर इस दूध का लेप करने से बहुत आराम होता है ।*

*🔸मुफ्त में उपलब्ध यह दूध अच्छे से अच्छे बलवीर्यवर्द्धक नुस्खे की बराबरी कर सकता है । वीर्य- विकार व कमजोरी के शिकार रोगियों को धैर्य के साथ लगातार ऊपर बताई विधि के अनुसार इसका सेवन करना चाहिये ।*

*🔸बड़ की छाल का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन एक कप मात्रा में पीने से मधुमेह (डायबिटीज) में फायदा होता है व शरीर में बल बढ़ता है ।*

*🔸उसके कोमल पत्तों को छाया में सुखाकर कूट- पीस लें । आधा लिटर पानी में एक चम्मच चूर्ण डालकर काढ़ा करें । जब चौथाई पानी शेष बचे तब उतारकर छान लें और पिसी मिश्री मिलाकर कुनकुना करके पियें । यह प्रयोग दिमागी शक्ति बढ़ाता है व नजला- जुकाम ठीक करता है ।*

*🔹 रविवार विशेष🔹*

*🔸रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*

*🔸रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)*

*🔸रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)*

*🔸 रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।*

*🔸 रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए ।*

*🔸स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।*

*🔸 रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।*

*🔸रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित है ।*

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*🌞संत श्री आशारामजी बापू आश्रम🌞*