छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के हड़ताली कर्मचारियों पर सरकार द्वारा एस्मा (ESMA) लागू किए जाने के फैसले को कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कर्मचारी अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार ने संवाद करने के बजाय सीधे कठोर कानून लागू कर दिया, जो “पूरी तरह गलत और तानाशाही” है।
कांग्रेस का आरोप—सरकार सुनने के बजाय दमन कर रही है
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को समझने के बजाय सरकार “तानाशाही रवैया” अपना रही है।
उन्होंने कहा—
“सरकार ने मोदी गारंटी के नाम पर झूठ बोलकर सत्ता हासिल की। कर्मचारियों की मांगें स्वीकार करने की बजाय उन पर एस्मा लगा दिया गया। यह दमनकारी कार्रवाई है।”
बैज ने यह भी बताया कि पिछले साल की तरह इस बार भी कांग्रेस के नेता धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण करेंगे और स्थिति का जायजा लेंगे।
रायपुर में हड़ताल—सरकार की चेतावनी
रायपुर सहित प्रदेशभर के सहकारी समिति कर्मचारियों की चार सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल जारी है।
इसी बीच सरकार ने एस्मा के तहत चेतावनी दी है कि धान खरीदी कार्य में बाधा डालने वाले कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सहकारिता विभाग ने हड़ताली कर्मचारियों से अपील की है कि
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शनिवार और रविवार तक काम पर लौट आएं
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अन्यथा सोमवार से सख्त कार्रवाई शुरू होगी
विभाग का दावा है कि धान खरीदी की पूरी तैयारी हो चुकी है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक स्टाफ भी तैनात कर दिया गया है। कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर नोडल अधिकारियों तक—सभी की नियुक्ति पूरी कर ली गई है।
पदाधिकारियों पर कार्रवाई—सेवाएं समाप्त
हड़ताल का नेतृत्व कर रहे सहकारी समिति कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों पर सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं।
सरकार का कहना है कि धान खरीदी जैसे महत्वपूर्ण कार्य में बाधा स्वीकार नहीं की जा सकती।
मुद्दा क्या है?
सहकारी कर्मचारी अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।
इनमें मुख्य रूप से
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वेतनमान
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सेवा शर्तों का सुधार
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पदोन्नति
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नियमितीकरण
जैसी मांगें शामिल हैं।
