बाजार पर BSE की सख्ती: 75 शेयरों के सर्किट लिमिट में बदलाव, आज से लागू नए नियम

मुंबई। Bombay Stock Exchange (BSE) ने बाजार में असामान्य तेजी, बढ़ते वॉल्यूम और संभावित सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक्सचेंज ने 75 शेयरों के प्राइस बैंड यानी सर्किट लिमिट में बदलाव किया है, जो 13 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है।

BSE के मुताबिक, यह फैसला बाजार में शुरुआती स्तर पर गड़बड़ी पकड़ने और शेयरों की कीमतों में हेरफेर को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।

क्या है पूरा मामला

हाल के दिनों में कुछ स्मॉलकैप और कम लिक्विडिटी वाले शेयरों में अचानक तेजी, भारी वॉल्यूम और सट्टेबाजी जैसे संकेत देखने को मिले थे। इसके बाद BSE ने ऐसे 75 शेयरों की पहचान की और उनकी ट्रेडिंग पर नियंत्रण के लिए सर्किट फिल्टर में बदलाव कर दिया।

प्राइस बैंड बदलने का मतलब

प्राइस बैंड या सर्किट लिमिट वह सीमा होती है, जिसके भीतर कोई शेयर एक दिन में ऊपर या नीचे जा सकता है।

  • उदाहरण के तौर पर, 20% सर्किट वाले शेयर की कीमत एक दिन में अधिकतम 20% ऊपर या नीचे जा सकती है।
  • अगर इसे घटाकर 10% कर दिया जाए, तो शेयर की चाल सीमित हो जाती है।

यानी, सर्किट घटाना बाजार में अचानक होने वाली तेज हलचल पर ब्रेक लगाने जैसा है।

किन शेयरों पर असर

इस फैसले के तहत कई चर्चित और स्मॉलकैप शेयर शामिल हैं, जिनमें

  • Ola Electric Mobility Ltd
  • Sterlite Technologies Ltd
  • Prime Focus Ltd
    जैसी कंपनियां भी शामिल हैं।

इनके अलावा कुल 75 शेयरों के सर्किट फिल्टर में बदलाव किया गया है, जिनमें कुछ के सर्किट घटाए गए हैं तो कुछ के बढ़ाए भी गए हैं।

निवेशकों के लिए क्या मतलब

  • शेयरों में अचानक तेज उछाल या गिरावट पर रोक लगेगी
  • अपर और लोअर सर्किट जल्दी लग सकते हैं
  • इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए मौके सीमित हो सकते हैं
  • स्मॉलकैप शेयरों में निवेश करते समय अधिक सतर्कता जरूरी होगी

बाजार पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि BSE का यह कदम बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और अनावश्यक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। हालांकि, इससे शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग स्ट्रेटजी पर असर पड़ सकता है।