कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर कैबिनेट फेरबदल को लेकर हलचल तेज हो गई है। मंत्रिमंडल में बदलाव और नए चेहरों को मौका देने की मांग कर रहे करीब 40 सीनियर विधायकों में से 30 विधायक रविवार को दिल्ली पहुंच गए। ये सभी पार्टी हाईकमान से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे।
जानकारी के मुताबिक, तीन से ज्यादा बार विधायक रह चुके वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मौजूदा मंत्रियों को लगभग तीन साल का कार्यकाल मिल चुका है, इसलिए अब अनुभवी विधायकों को भी मौका दिया जाना चाहिए। वहीं, पहली बार निर्वाचित हुए 38 कांग्रेस विधायक भी सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर कम से कम 5 नए चेहरों को मंत्री बनाने की मांग की है।
मांड्या से विधायक रविकुमार गौड़ा ने कहा कि पार्टी को नए चेहरों को आगे लाकर संतुलन बनाना चाहिए।
प्रदेश में वर्तमान में सिद्धारमैया के नेतृत्व में सरकार चल रही है। कर्नाटक में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 मंत्रियों की अनुमति है, लेकिन फिलहाल दो मंत्री पद खाली हैं। एक पद बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद खाली हुआ, जिन पर महर्षि वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में गबन के आरोप लगे थे। दूसरा पद केएन राजन्ना को पार्टी हाईकमान के निर्देश पर हटाए जाने के बाद खाली हुआ।
दिल्ली पहुंचे विधायकों में टीबी जयचंद्र, अशोक पट्टन, एसएन नारायणस्वामी, पुट्टारंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण समेत कई नाम शामिल हैं।
ये नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और संभव हो तो राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं।
विधायक अशोक पट्टन ने कहा कि पोर्टफोलियो बंटवारे के समय सभी को मौका देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कुछ नेताओं को बार-बार मंत्री बनाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक किसी तरह का दबाव नहीं बना रहे, बल्कि पार्टी को उसका पुराना वादा याद दिला रहे हैं।
अब देखना होगा कि पार्टी हाईकमान इस मांग पर क्या फैसला लेता है और क्या कर्नाटक में जल्द कैबिनेट फेरबदल देखने को मिलता है।
