वेदांता ग्रुप के ठिकानों पर ED का छापा, मुंबई-दिल्ली दफ्तरों में जांच तेज

नई दिल्ली 02 जून 2026 : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) के दिल्ली, मुंबई और राजस्थान सहित कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन की जांच के सिलसिले में की जा रही है।रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच एजेंसी की यह कार्रवाई सोमवार से ही शुरू हो गई थी और मंगलवार (2 जून 2026) को भी इसके दफ्तरों में तलाशी अभियान जारी रहा।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप के दफ्तरों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई सोमवार को शुरू हुई, जब अधिकारियों ने मुंबई और दिल्ली में कंपनी के कार्यालयों पर तलाशी अभियान चलाया। ED की टीम ने मुख्य रूप से जांच की हैं ताकि ऐसे मामलों का पता लगाया जा सके, जो विदेशी मुद्रा के असामान्य लेन-देन से जुड़े हो सकते हैं। इसकी वजह से वेदांता ग्रुप की वित्तीय स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।

ED ने इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य FEMA के प्रावधानों के उल्लंघन की जांच करना बताया है। अधिकारियों के अनुसार, अनिल अग्रवाल की कंपनी ने विदेशी मुद्रा के नियमों का पालन नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के मुताबिक, ईडी की यह जांच वेदांता लिमिटेड द्वारा अपनी मूल (पैरेंट) कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को किए गए सीमा पार (Cross-border) रॉयल्टी भुगतानों और विदेशी मुद्रा लेनदेन से जुड़ी हुई है। यह मामला तब सामने आया जब कुछ वित्तीय आंकड़े और ट्रांजैक्शन की जानकारी अधिकारियों के संज्ञान में आई। जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला बहुत गंभीर है और इसकी तहकीकात जल्द से जल्द की जाएगी।

वेदांता ग्रुप, जिसका नेतृत्व अनिल अग्रवाल कर रहे हैं, भारत की प्रमुख खनन कंपनियों में से एक है। कंपनी का काम कई क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिसमें धातु, ऊर्जा और खनन शामिल हैं। देश के विकास में कंपनी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, लेकिन इस तरह की जांच कंपनी की छवि पर सवाल खड़ा कर सकती है। इससे निवेशकों की चिंताएँ भी बढ़ सकती हैं, जो कंपनी की ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इस जांच के दौरान, ED ने वित्तीय लेन-देन में संभावित अनियमितताओं की जानकारी प्राप्त की है। जांचकर्ताओं ने कई संगठनों से संपर्क किया है जिनसे वेदांता ग्रुप ने वित्तीय लेन-देन किए हैं। इससे पता चल सकता है कि क्या कंपनी ने विदेशी मुद्रा लेने या देने में कोई कानून का उल्लंघन किया है या नहीं। यह तथ्य और भी महत्वपूर्ण बन जाते हैं, जबकि भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

वेदांता ग्रुप के लिए यह जांच एक गंभीर चुनौती बन सकती है। यदि जांच में कंपनी के खिलाफ ठोस सबूत मिलते हैं, तो इससे उसकी ऑपरेशन और वित्तीय स्थिरता पर सवाल उठ सकते हैं। निवेशक और विश्लेषक इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इससे कंपनी की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। इस मामले की संवेदनशीलता और जांच की प्रकृति, कंपनी के भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वेदांता समूह के प्रवक्ता ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा है कि कंपनी जांच अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रही है और मांगी जा रही सभी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करा रही है। कंपनी ने नियमों के पूरी तरह पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है।

इस तरह की जांच का उद्देश्य सामान्यतः वित्तीय पारदर्शिता और नियंत्रण को सुनिश्चित करना होता है। सरकार ने हमेशा से कंपनी और बाजारों में उचितता बनाए रखने की आवश्यकता को बताया है। ऐसे मामलों में, जहाँ बड़ी कंपनियाँ शामिल होती हैं, पारदर्शिता को बढ़ावा देना और उपभोक्ताओं के विश्वास को बनाना बहुत महत्वपूर्ण होता है। आगे चलकर, यह देखना होगा कि ED इस मामले में क्या कदम उठाता है और वेदांता ग्रुप किस तरह से अपनी स्थिति को संभालता है।

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