रायपुर 03 जुलाई 2026 : राजधानी रायपुर में नकटी गांव के विस्थापितों ने शुक्रवार को अपनी मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने पहले कलेक्ट्रेट के सामने नारेबाजी की और बाद में मंत्री के बंगले का घेराव कर प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें बिना उचित पुनर्वास और पर्याप्त मुआवजा दिए बेदखल किया गया, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ गया है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने भी हिस्सा लिया। विस्थापितों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए तथा मांग की कि उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास, मुआवजा और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि हाल ही में प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान उनके घरों पर बुलडोजर चलाया। उनका आरोप है कि सुबह-सुबह बिजली काटकर कार्रवाई की गई, जिससे परिवारों को अपना सामान तक समेटने का मौका नहीं मिला। कई परिवार फिलहाल अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं।
इस बीच वरिष्ठ भाजपा नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया है या मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी की है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विस्थापन से पहले पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई थी। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि, विस्थापितों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं होगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
विस्थापितों की प्रमुख मांगें
- सभी प्रभावित परिवारों का उचित पुनर्वास किया जाए।
- बाजार दर के अनुसार मुआवजा दिया जाए।
- बेघर हुए परिवारों को तत्काल आवास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
- विस्थापन प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों से संवाद और कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की प्रक्रिया जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर शासन के स्तर पर निर्णय होने की संभावना जताई जा रही है।
