चंडीगढ़ 04 जुलाई 2026 : पंजाब में सत्ता वापसी की कोशिशों में जुटी कांग्रेस के भीतर टिकट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। स्थिति इस कदर गंभीर हो चुकी है कि आलाकमान को पार्टी में बड़ी टूट रोकने के लिए सीधे दखल देना पड़ा है। दिल्ली से आए कड़े संदेशों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को एक बड़ा फैसला लेने से रोक दिया गया है, वहीं पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के एक बयान ने राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
1. चन्नी गुट का शक्ति प्रदर्शन और दिल्ली का ‘रेड सिग्नल’
कांग्रेस आलाकमान द्वारा पंजाब में राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद पर बरकरार रखने और चन्नी को सिर्फ प्रचार समिति (Campaign Committee) का चेयरमैन बनाए जाने से चन्नी खेमा बेहद नाराज है।
सीक्रेट मीटिंग और अल्टीमेटम: चरणजीत सिंह चन्नी ने मोरिंडा स्थित अपने आवास पर मौजूदा विधायकों, पूर्व मंत्रियों और कई पूर्व विधायकों के साथ एक बड़ी बैठक की। इस बैठक में चन्नी समर्थकों ने आलाकमान को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि राजा वड़िंग को हटाकर चन्नी को पंजाब कांग्रेस की पूरी कमान सौंपी जाए।
दिल्ली से आया फोन: सूत्रों के मुताबिक, इस बगावती रुख के बीच चन्नी कोई बड़ा या कड़ा फैसला (जैसे किसी अन्य दल का रुख करना या बड़ा मोर्चा खोलना) लेने वाले थे। लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने तुरंत हस्तक्षेप किया। दिल्ली से वरिष्ठ नेताओं ने चन्नी से सीधे बात की और उन्हें राहुल गांधी के विदेश से लौटने तक किसी भी बड़े कदम को उठाने से सख्त तौर पर रोक दिया है।
2. राजा वड़िंग का बड़ा बयान: ‘पिछला चुनाव हारने वालों की कटेगी टिकट’
इसी खींचतान के बीच प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के एक ताजा नीतिगत बयान ने आग में घी डालने का काम किया है।
“पिछला विधानसभा चुनाव लड़ चुके और बड़े अंतर से हारने वाले नेताओं की इस बार टिकट काटी जा सकती है। पार्टी इस बार नए और जमीन से जुड़े चेहरों को मौका देने की रणनीति पर काम कर रही है।”
— अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, अध्यक्ष (पंजाब कांग्रेस)
वड़िंग के इस बयान के बाद उन पूर्व विधायकों और मंत्रियों में हड़कंप मच गया है जो 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की लहर में अपनी सीटें गंवा बैठे थे। नाराज नेताओं का मानना है कि यह नियम चन्नी गुट और उनके समर्थकों को राजनीतिक रूप से किनारे करने के लिए लाया जा रहा है।
3. विवाद की असली जड़: 2027 में ‘मुख्यमंत्री की कुर्सी’ की जंग
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह लड़ाई केवल पद या टिकट की नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री चेहरे की दावेदारी की है।
परंपरा की दुहाई: पंजाब कांग्रेस में अमूमन जो नेता प्रदेश अध्यक्ष होता है, वही चुनाव जीतने पर सीएम पद का मुख्य दावेदार माना जाता है। राजा वड़िंग के अध्यक्ष बने रहने से चन्नी खेमे को लग रहा है कि उनके लिए सीएम की रेस मुश्किल हो जाएगी।
जातीय समीकरण का पेंच: कांग्रेस आलाकमान जट सिख (राजा वड़िंग) और दलित सिख (चरणजीत सिंह चन्नी) दोनों ही बड़े वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहता, जिसके चलते पार्टी ने दोनों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दीं। लेकिन यह फार्मूला राज्य में काम करता नहीं दिख रहा है।
4. क्या टूट जाएगी पंजाब कांग्रेस?
चन्नी खेमे की इस बैठक के बाद यह अफवाहें भी तेज हैं कि अगर आलाकमान ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो कई वरिष्ठ नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) या अन्य विकल्पों की तरफ रुख कर सकते हैं। फिलहाल प्रभारी भूपेश बघेल और आलाकमान दोनों गुटों को शांत करने और डैमेज कंट्रोल में जुटे हुए हैं।
आगे क्या?
आने वाले 7 दिन पंजाब कांग्रेस के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। देखना होगा कि राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद चन्नी और वड़िंग के बीच की यह ‘कोल्ड वॉर’ खत्म होती है या पार्टी एक बार फिर 2022 की तरह बिखर जाती है।
