रायपुर 10 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के सभी विद्यालयों में कक्षा पहली में दाखिले के लिए बच्चों की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित कर दी गई है। यह नया नियम आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा।
राज्य सरकार ने यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP), निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश
स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को नए नियम का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
अब सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में कक्षा पहली में प्रवेश देते समय बच्चे की आयु का विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा। स्कूलों को नए नियमों के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया संचालित करनी होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार किया गया बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में बच्चों के शुरुआती विकास और सीखने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए 5+3+3+4 शिक्षा प्रणाली लागू करने की बात कही गई है। इसके तहत शुरुआती पांच वर्षों में तीन वर्ष की आंगनबाड़ी या प्री-स्कूल शिक्षा और उसके बाद कक्षा पहली से औपचारिक शिक्षा शुरू करने का प्रावधान है।
इसी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पहली कक्षा में प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष तय की गई है।
बच्चों के मानसिक विकास को मिलेगा फायदा
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 6 वर्ष की उम्र में बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से कक्षा पहली की पढ़ाई के लिए अधिक तैयार होते हैं। इससे बच्चों में समझने, सीखने और गतिविधियों में भाग लेने की क्षमता बेहतर विकसित हो सकती है।
सरकार का उद्देश्य बच्चों को उनकी उम्र और विकास के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराना है।
अभिभावकों को रखना होगा आयु का ध्यान
नए नियम लागू होने के बाद अभिभावकों को अपने बच्चों के प्रवेश के समय आयु संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान जन्म प्रमाण पत्र या अन्य निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर आयु का सत्यापन किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए नियम से स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।
