मोबाइल यूजर्स को राहत! बिना डेटा वाले रिचार्ज प्लान हो सकते हैं सस्ते

नई दिल्ली 11 जुलाई 2026 : देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने एक नया ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया है, जिसके लागू होने के बाद बिना डेटा (इंटरनेट) वाले मोबाइल रिचार्ज प्लान की कीमतों में भारी कटौती हो सकती है। नियमों में बदलाव के बाद कॉलिंग और SMS वाले प्लान की कीमतें मौजूदा बंडल प्लान्स के मुकाबले 70% तक घट सकती हैं। ट्राई ने इसके लिए ‘टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन (13वां संशोधन) रेगुलेशन, 2026’ का ड्राफ्ट जारी कर सभी हितधारकों और आम जनता से सुझाव मांगे हैं।

वर्तमान में जब कोई ग्राहक मोबाइल रिचार्ज कराता है, तो उसे कॉलिंग और SMS के साथ जबरन डेटा (इंटरनेट) और ओटीटी ऐप्स का बंडल प्लान लेना पड़ता है, जिससे रिचार्ज काफी महंगा हो जाता है। ट्राई के नए प्रस्ताव के अनुसार ,

  • हर वैलिडिटी के लिए ‘ओनली वॉइस’ प्लान जरूरी: टेलीकॉम कंपनियों (Jio, Airtel, Vi) को हर उस वैलिडिटी अवधि (जैसे 28 दिन, 56 दिन या 84 दिन) के लिए एक अलग ‘सिर्फ कॉलिंग और SMS’ वाला प्लान भी लाना होगा, जो वे डेटा बंडल के साथ दे रही हैं।

  • कीमतों में आनुपातिक कटौती: नया नियम कहता है कि चूंकि इन प्लान्स से डेटा हटा दिया जाएगा, इसलिए इनकी कीमतों को भी उसी अनुपात में काफी कम (अनुमानित तौर पर 70% तक सस्ता) रखना होगा।

  • आसानी से दिखेंगे प्लान: कंपनियों को इन सस्ते प्लान्स को अपनी वेबसाइट, ऐप्स और रीटेल स्टोर्स पर प्रमुखता से दिखाना होगा ताकि लोग इन्हें आसानी से चुन सकें।

    क्यों पड़ी इस नियम की जरूरत?

    ट्राई ने अपनी समीक्षा में पाया कि देश में एक बड़ा वर्ग ऐसा है (विशेषकर बुजुर्ग, ग्रामीण इलाकों के लोग और फीचर फोन/कीपैड फोन इस्तेमाल करने वाले) जिन्हें इंटरनेट की जरूरत नहीं होती है। वे सिर्फ कॉल करने या सिम चालू रखने के लिए महंगे डेटा प्लान खरीदने को मजबूर हैं।

    इससे पहले 2024 में भी ट्राई ने कंपनियों को कम से कम एक ‘सिर्फ वॉइस’ प्लान लाने को कहा था। लेकिन कंपनियों ने उन प्लान्स की कीमत इतनी ज्यादा रखी कि ग्राहकों को कोई खास फायदा नहीं हुआ। इसी मनमानी को रोकने के लिए ट्राई अब कड़ा रुख अपना रहा है।

    टेलीकॉम कंपनियों ने किया विरोध

    ट्राई के इस प्रस्ताव का रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया (Vi) जैसी बड़ी कंपनियों ने कड़ा विरोध किया है। कंपनियों का तर्क है कि हर वैलिडिटी के लिए अलग से बिना डेटा वाला प्लान बनाना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से ठीक नहीं है और इससे उनके बिजनेस मॉडल पर असर पड़ेगा।

    आम जनता को क्या होगा फायदा?

    अगर यह ड्राफ्ट फाइनल कानून का रूप ले लेता है, तो आम उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के हिसाब से प्लान चुनने की आजादी मिलेगी। जो लोग सिर्फ बात करने के लिए फोन का इस्तेमाल करते हैं, उनका मासिक मोबाइल खर्च घटकर एक-तिहाई रह जाएगा।