दिल्ली 31 जुलाई 2026 : दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि इस मामले में अपराध बेहद क्रूर तरीके से किया गया। अदालत ने कहा कि हत्या के बाद भी क्रूरता यहीं खत्म नहीं हुई। मृतक के शव को घसीटकर पास के नाले में फेंक दिया गया, जो इस घटना की गंभीरता और अमानवीयता को दिखाता है।
कोर्ट ने कहा अपराध का तरीका बेहद भयावह
कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस अपराध का तरीका बेहद भयावह था। अदालत के अनुसार, यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” यानी सबसे दुर्लभ और गंभीर अपराधों की श्रेणी की ओर झुकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में अपराध की भयावहता आरोपी के पक्ष में मौजूद किसी भी राहत देने वाली परिस्थितियों से कहीं अधिक है।
सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है मामला
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है। उस दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी, जिसमें कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इसी हिंसा के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो में कार्यरत अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, अंकित शर्मा का शव एक नाले से बरामद किया गया था। मामले की जांच के बाद पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन सहित कई लोगों के खिलाफ हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
दोषी पक्ष को दिया गया ये आधिकार
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया और अब उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के अपराध समाज पर गहरा असर डालते हैं और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कड़ी सजा जरूरी है। इस फैसले के साथ ही दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक में कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। हालांकि, दोषी पक्ष के पास उच्च अदालत में इस फैसले को चुनौती देने का कानूनी अधिकार मौजूद रहेगा।
