अर्थशास्त्रियों के प्रमुख अनुमान:
यथास्थिति की संभावना: अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) और महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते आरबीआई मुख्य नीतिगत दर रेपो को 5.25% पर स्थिर रख सकता है।
कच्चा तेल और मुद्रा पर दबाव: एसबीआई के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष के अनुसार, कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा है और रुपया 93 प्रति डॉलर के स्तर से ऊपर बना हुआ है, जिससे आयातित महंगाई का जोखिम बढ़ गया है।
इक्रा का दृष्टिकोण: इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक फिलहाल यथास्थिति बनाए रखना पसंद करेगा और कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले आगामी महंगाई के आंकड़ों का इंतजार करेगा।
क्रिसिल की राय: क्रिसिल की प्रधान अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि यदि महंगाई आरबीआई के निर्धारित लक्ष्य के दायरे में बनी रहती है, तो नीतिगत दरों को फिलहाल स्थिर रखा जा सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा का आकलन: मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने भी इस बार रेपो रेट में किसी भी तरह के बदलाव की उम्मीद से इनकार किया है और कहा है कि आरबीआई का रुख सतर्क बना रहेगा।
आरबीआई ने इससे पहले पिछले साल फरवरी से लेकर अब तक कुल 1.25 फीसदी की कटौती की है। हालांकि, इसके बाद अगस्त, अक्टूबर और फरवरी 2026 की बैठकों में दरों को लगातार अपरिवर्तित (यथावत) रखा गया है। अब सभी की निगाहें बुधवार को आने वाले आरबीआई के नीतिगत रुख और जीडीपी व महंगाई के नए अनुमानों पर टिके हैं।
