तोरवा क्षेत्र के एक परिवार ने सालों से एक कुत्ता पाला हुआ था। परिवार के सदस्यों के लिए वह सिर्फ पालतू नहीं, बल्कि घर का हिस्सा बन चुका था। गुरुवार को अचानक कुत्ते की मौत हो गई। शोक में डूबे परिवार के लोग अंतिम विदाई देना चाहते थे। वे कुत्ते का शव लेकर सीधे तोरवा मुक्तिधाम पहुंच गए।
मुक्तिधाम के पास एक युवक खड़ा था। परिवार ने उससे बात की। युवक ने कहा कि वह पहले भी पालतू जानवरों को मुक्तिधाम में जला चुका है। परिवार से रुपये लेकर उसने कुत्ते को वहीं चिता पर रख दिया और अंतिम संस्कार कर दिया। आग की लपटें उठने लगीं… लेकिन खबर फैलते देर नहीं लगी।
मोहल्ले के लोग जैसे ही जान पाए कि मुक्तिधाम में कुत्ते का अंतिम संस्कार हो रहा है, आक्रोश की लहर दौड़ गई। लोग कहने लगे— “यह हमारी परंपराओं के खिलाफ है। मुक्तिधाम इंसानों के लिए है, जानवरों के लिए नहीं।” विरोध बढ़ता गया। लोगों ने स्थानीय पार्षद को सूचना दी।
पार्षद ने तुरंत तोरवा थाने में शिकायत दर्ज कराई। जानकरी के मुताबिक परिवार ने कुत्ते की मौत के बाद उसे मुक्तिधाम ले जाकर एक युवक से बात करके अंतिम संस्कार कराया। युवक ने पैसे लेकर काम किया।
प्रारंभिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ— कुत्ते को जलाने वाला युवक फरार हो गया है। अब पुलिस परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है और युवक की तलाश में जुट गई है।
यह घटना सिर्फ एक कुत्ते के अंतिम संस्कार की नहीं है। यह भावनात्मक लगाव, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक संवेदनाओं के बीच टकराव की कहानी है। जहां एक तरफ परिवार ने अपने पालतू को इंसान जैसा सम्मान देना चाहा, वहीं मोहल्ले वालों ने इसे मुक्तिधाम की पवित्रता पर प्रहार माना।
अभी जांच चल रही है। युवक कब पकड़ा जाएगा और परिवार के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी— यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन तोरवा का यह मुक्तिधाम अब एक विवादित चर्चा का केंद्र बन चुका है।
