कोलकाता 25 अगस्त 2026 : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 कथित बागी सांसदों की सदस्यता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाया। ममता बनर्जी की पार्टी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सभी 20 सांसदों को नोटिस जारी किया है। इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की मांग की गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने अदालत से कहा कि वह लोकसभा अध्यक्ष से इस मामले में निर्देश लेकर कोर्ट को जानकारी देंगे।
स्पीकर को अभी नोटिस जारी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल लोकसभा स्पीकर को नोटिस जारी करने से इनकार किया है। अदालत ने कहा कि वह संवैधानिक संस्था को सीधे कोई निर्देश नहीं देना चाहती, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित मामलों में फैसला उचित समय के भीतर हो।
जस्टिस बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत संवैधानिक संस्था को निर्देश नहीं देना चाहती, लेकिन मामलों पर समय से निर्णय लिया जाना जरूरी है। इसके बाद कोर्ट ने फिलहाल स्पीकर को नोटिस जारी नहीं किया और अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
TMC ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों दाखिल की याचिका?
तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर याचिका में आरोप है कि 20 सांसदों के पार्टी बदलने के बाद उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग वाली याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष की ओर से अब तक फैसला नहीं लिया गया है।
TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए मांग की थी कि लोकसभा अध्यक्ष को दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों के खिलाफ लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने के लिए कहा जाए।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने 20 सांसदों को नोटिस जारी कर मामले में उनका पक्ष जानने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले की आगे की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि इन सांसदों की सदस्यता और अयोग्यता को लेकर अदालत क्या रुख अपनाती है।
