आयुर्वेदिक परिषद चुनाव को झटका नहीं, हाईकोर्ट ने रोक से किया इनकार; मतदान की गोपनीयता पर सवाल

बिलासपुर 07 सितम्बर 2026 : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य आयुर्वेदिक, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति चुनाव कराए जाने को लेकर नहीं, बल्कि चुनाव की प्रक्रिया और कुछ तकनीकी व्यवस्थाओं से संबंधित है।

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति देते हुए याचिका का निराकरण कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद परिषद चुनाव को लेकर चल रही अनिश्चितता समाप्त हो गई है।

बैलेट पेपर की डिजाइन को लेकर जताई गई थी आपत्ति

याचिकाकर्ताओं की ओर से चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे अदालत के सामने रखे गए थे। इनमें प्रमुख रूप से बैलेट पेपर की डिजाइन को लेकर आपत्ति जताई गई थी।

इसके अलावा मतदान की गोपनीयता और चुनाव सामग्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि चुनाव प्रक्रिया में इन व्यवस्थाओं को लेकर उचित सावधानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

हालांकि, अदालत ने इन आपत्तियों के आधार पर पूरी चुनाव प्रक्रिया को रोकने की आवश्यकता नहीं मानी।

मतदान की गोपनीयता और सुरक्षा पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि मतदान के दौरान मतदाताओं की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रहनी चाहिए। लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया में मतदान की गोपनीयता को महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसके साथ ही बैलेट पेपर और अन्य चुनाव सामग्री की सुरक्षा को लेकर भी याचिका में सवाल उठाए गए थे। चुनाव सामग्री के सुरक्षित रखरखाव और उसके उपयोग की व्यवस्था पर याचिकाकर्ताओं ने अपनी चिंताएं जाहिर की थीं।

हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद चुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

चुनाव प्रक्रिया जारी रहेगी

अदालत के फैसले के बाद अब राज्य आयुर्वेदिक, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के चुनाव की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ सकेगी।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए मुद्दों का केंद्र चुनाव कराने का विरोध नहीं था, बल्कि चुनाव की व्यवस्था से जुड़ी आपत्तियां थीं। ऐसे में केवल इन आधारों पर चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह रोकना उचित नहीं माना गया।