MP में डोल ग्यारस की धूम, निकले भव्य चल समारोह; हाटपीपल्या में 150 साल पुरानी परंपरा

उज्जैन 22 सितम्बर 2026 : मध्य प्रदेश में डोल ग्यारस (जलझूलनी एकादशी) का पर्व पूरी आस्था, उत्साह और परंपरागत उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर उज्जैन, इंदौर, देवास और भोपाल सहित तमाम शहरों में भव्य चल समारोह, आकर्षक झांकियां और धार्मिक यात्राएं निकाली जा रही हैं।

उज्जैन: बाबा कालभैरव की राजसी सवारी और फूलडोल चल समारोह

धार्मिक नगरी उज्जैन में डोल ग्यारस का पर्व बेहद खास माना जाता है, जहाँ भगवान महाकाल के सेनापति और नगर कोतवाल भगवान कालभैरव की सवारी विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। ग्वालियर से आई सिंधिया शाही पगड़ी: परंपरा के अनुसार, ग्वालियर राजमहल से आई ऐतिहासिक सिंधिया शाही पगड़ी डोल ग्यारस के अवसर पर बाबा कालभैरव को पूरे विधान के साथ धारण कराई गई। दोपहर में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने पूजा-अर्चना कर बाबा को पगड़ी अर्पित की। सवारी का मार्ग और प्रमुख पड़ाव: यह सवारी नया बाजार, भैरवगढ़ नाका, माणक चौक और महेंद्र मार्ग से होते हुए केंद्रीय जेल तिराहे पहुँची, जहाँ जेल अधीक्षक ने पालकी का पूजन किया। इसके बाद सवारी सिद्धवट पहुँची, जहाँ वैकुंठ द्वार पर पुजारियों ने शिप्रा जल से भगवान के रजत मुखारविंद और चरण पादुकाओं का पूजन किया। रात करीब 7:30 बजे सवारी वापस मंदिर लौटी।

बैरवा समाज का फूलडोल चल समारोह: इसके अलावा मक्सी रोड स्थित किशनपुरा मंदिर से बैरवा समाज की ओर से भव्य फूलडोल चल समारोह निकाला गया, जिसमें 24 डोल, 16 मनमोहक झांकियां और 10 से अधिक रासमंडल शामिल हुए।

अन्य प्रमुख शहरों में डोल ग्यारस के आयोजन

इंदौर: व्यापारिक नगरी इंदौर में राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न समाजों और अखाड़ों द्वारा भव्य चल समारोह निकाले गए। सिद्धेश्वर हनुमान व्यायाम शाला, लोधी समाज (जूना रिसाला), प्रजापति समाज (कुम्हारखाड़ी), कोष्टी समाज (राजकुमार मिल धर्मशाला) और परदेशीपुरा से देवांग कोष्टी समाज का 132 साल पुराना पारंपरिक चल समारोह मुख्य आकर्षण रहे। सुरक्षा के मद्देनजर यातायात डायवर्जन भी लागू किया गया।

देवास (हाटपिपल्या): देवास जिले के हाटपिपल्या में डोल ग्यारस पर डेढ़ सौ साल पुरानी अनूठी परंपरा का निर्वहन किया गया। यहाँ भमोरी नदी के नरसिंह घाट पर भगवान नरसिंह की पाषाण प्रतिमा को पानी में उतारकर आगामी वर्ष की खुशहाली और फसल का शकुन देखा गया।

डोल ग्यारस को ‘दान एकादशी’ भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के बाल स्वरूप (श्रीकृष्ण) को डोल में झुलाने और जल विहार कराने का विधान है, जिसे लेकर प्रदेशभर के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान जारी हैं।