बिलासपुर 01 October 2026 : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2025 की मेंस परीक्षा के रिजल्ट और उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच की मांग वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस बीडी गुरु की अदालत ने कहा कि परीक्षा नियमों में उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही, याचिकाकर्ता मूल्यांकन में किसी स्पष्ट या विशिष्ट गड़बड़ी को साबित नहीं कर सके।
265 पदों के लिए 608 अभ्यर्थियों का चयन
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, 26 नवंबर 2025 के विज्ञापन के आधार पर उन्होंने CGPSC मेंस परीक्षा दी थी। परीक्षा का रिजल्ट 31 अगस्त 2026 को जारी किया गया। आयोग ने 265 पदों के लिए 608 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए योग्य घोषित किया।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि नियमानुसार रिक्त पदों के तीन गुना यानी 1:3 के अनुपात में 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना चाहिए था। उन्होंने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन की मांग की थी।
PSC ने बताया- न्यूनतम अंक हासिल करने वाले ही हुए चयनित
मामले में CGPSC की ओर से बताया गया कि नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 23 प्रतिशत अंक निर्धारित थे। आयोग के मुताबिक केवल 608 अभ्यर्थी ही अपने संबंधित वर्ग में निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल कर सके। इसी आधार पर उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया।
हाईकोर्ट ने PSC के शपथपत्र का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि न्यूनतम निर्धारित अंक हासिल करने वाले किसी अभ्यर्थी को इंटरव्यू की प्रक्रिया से बाहर किया गया।
कोर्ट ने कहा- 1:3 अनुपात का दावा साबित नहीं हुआ
हाईकोर्ट ने माना कि केवल रिक्तियों की संख्या के तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि संबंधित नियमों में निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल करना भी जरूरी है। अदालत के समक्ष ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं रखा गया, जिससे यह साबित हो कि पात्र अभ्यर्थियों को इंटरव्यू से बाहर किया गया।
इस आधार पर कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया।
उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के राम विजय सिंह मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक मामलों में न्यायालय को विशेषज्ञों द्वारा किए गए मूल्यांकन में सामान्य तौर पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कोर्ट खुद उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर यह तय नहीं कर सकता कि कौन सा उत्तर सही है और कितने अंक दिए जाने चाहिए।
अदालत ने कहा कि मौजूदा परीक्षा नियमों में उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच या पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है। ऐसे में केवल कम अंक आने या मूल्यांकन पर संदेह होने के आधार पर पुनर्मूल्यांकन का आदेश नहीं दिया जा सकता। इसके लिए मूल्यांकन में स्पष्ट गड़बड़ी सामने आना जरूरी है।
608 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू फिलहाल स्थगित
CGPSC ने राज्य सेवा परीक्षा-2025 के अगले चरण यानी इंटरव्यू को फिलहाल स्थगित कर दिया है। आयोग ने इंटरव्यू टालने का कारण स्पष्ट नहीं किया है। नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि 265 पदों के लिए 1:3 के अनुपात में 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना चाहिए था। वहीं, आयोग का पक्ष है कि 187 अभ्यर्थी निर्धारित न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सके, इसलिए 608 अभ्यर्थी ही इंटरव्यू के लिए पात्र हुए।
