नईदिल्ली 01 October 2026 : दिवाली से पहले पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि वह पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन दिनभर यानी 24 घंटे पटाखे चलाने की खुली छूट भी नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा रास्ता तलाशना होगा, जिसमें लोगों की भावनाओं का सम्मान हो और बच्चों, बुजुर्गों व बीमार लोगों को प्रदूषण से होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सके।
तय समय में ही पटाखे चलाने का संकेत
जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पटाखों के इस्तेमाल के लिए विशेष समय तय किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी निर्धारित किया जा सकता है कि किस तरह के पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति होगी। कोर्ट ने कहा कि एक तरफ पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से लोगों की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं पर असर पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर पूरे दिन पटाखे चलाने से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों समेत अन्य जीवों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए दोनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।
नए जेनरेशन के पटाखों पर जोर
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से CSIR-NEERI की स्टडी का हवाला दिया गया। सरकार ने अदालत को बताया कि नए जेनरेशन के ग्रीन पटाखों में पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषण और ठोस कचरे को कम करने की क्षमता है। कोर्ट ने ऐसे नए जेनरेशन के ज्वाइंट पटाखों के निर्माण की सिफारिश को स्वीकार किया है, जिनमें छोटे शेल और लंबे समय तक फटने की विशेषता हो। हालांकि इनके निर्माण में प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा और निर्धारित शोर एवं अन्य पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा।
NEERI कर रहा चार शहरों में अध्ययन
केंद्र ने बताया कि CSIR-NEERI की ओर से Generation-2 ग्रीन पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बोरियम आदि के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। यह अध्ययन भोपाल, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, इस अध्ययन के पूरा होने की उम्मीद 15 अक्टूबर 2026 तक है। रिपोर्ट आने के बाद इसके नतीजे सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे जाएंगे।
दिल्ली-NCR पर अंतिम फैसला अभी बाकी
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दिल्ली-NCR में पटाखों के इस्तेमाल पर अलग से अंतिम आदेश नहीं दिया है। अदालत ने कहा कि दिल्ली-NCR से जुड़े प्रतिबंधों का मुद्दा एक अन्य मामले में भी विचाराधीन है, इसलिए दोनों मामलों को साथ में सुना जाना चाहिए। यानी फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि दिल्ली-NCR में पटाखे चलाने के लिए अंतिम समय तय हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह स्पष्ट किया है कि न तो पूर्ण प्रतिबंध और न ही बिना किसी सीमा के पटाखे चलाने की अनुमति दी जाएगी। आगे की सुनवाई में समय और पटाखों के प्रकार से जुड़े नियम स्पष्ट हो सकते हैं।
पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई निर्देश दे चुका है। 2018 में कोर्ट ने कम उत्सर्जन वाले और निर्धारित शोर मानकों का पालन करने वाले ग्रीन पटाखों को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे। इस साल दिवाली से पहले हुई सुनवाई में कोर्ट का मौजूदा रुख भी इसी तरह नियंत्रित इस्तेमाल और पर्यावरणीय मानकों पर केंद्रित नजर आया है।
