मध्यकालीन भारत और ‘Resistance and Resilience’ पर जोर
नई किताब में लगभग 1000 से 1700 ईस्वी के बीच के भारतीय इतिहास को ‘Resistance and Resilience’ यानी ‘विरोध और लचीलापन’ के नजरिए से प्रस्तुत किया गया है। इसमें अलग-अलग भारतीय शक्तियों द्वारा बाहरी आक्रमणों का सामना करने की घटनाओं को प्रमुखता दी गई है।
इसमें राजपूतों, अहोम, विजयनगर साम्राज्य, मराठों, सिखों और जाटों के प्रतिरोध का उल्लेख किया गया है। महाराणा प्रताप और अकबर के संघर्ष तथा 1671 की सरायघाट की लड़ाई में लाचित बोरफुकन के नेतृत्व का भी जिक्र है।
रानी अब्बक्का समेत भारतीय इतिहास की हस्तियों को जगह
नई पाठ्यपुस्तक में भारतीय इतिहास की कई ऐसी हस्तियों और क्षेत्रीय शक्तियों को शामिल किया गया है, जिन्हें नए पाठ्यक्रम में ज्यादा प्रमुखता दी गई है। इनमें रानी अब्बक्का का भी उल्लेख है। इसके अलावा भारतीय शासकों और उनके संघर्षों से जुड़े कई प्रसंगों को पाठ का हिस्सा बनाया गया है।
7वीं सदी के बाद के आक्रमणों का भी जिक्र
किताब में कहा गया है कि 7वीं सदी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप ने लगातार कई आक्रमणों का सामना किया। इसमें क्षेत्रीय विस्तार के साथ धार्मिक उद्देश्यों से जुड़े कारणों का भी उल्लेख किया गया है।
नई किताब में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े प्रसंग भी शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर बस्तर के शासक अन्नमराजा, विजयनगर के कुमार कंपन और छत्रपति शिवाजी से जुड़ी देवी और तलवार की मान्यताओं का उल्लेख किया गया है।
NCERT ने बदलाव की बताई ये वजह
NCERT प्रमुख दिनेश सकलानी ने किताब की प्रस्तावना में कहा है कि माध्यमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई का उद्देश्य विद्यार्थियों में विश्लेषण और चर्चा की क्षमता विकसित करना, आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना, विभिन्न संस्कृतियों को समझने की क्षमता बढ़ाना और नागरिक एवं सामाजिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ भाग लेने के लिए तैयार करना है।
नई किताब National Education Policy (NEP) 2020 और National Curriculum Framework for School Education (NCF-SE) 2023 के तहत पाठ्यपुस्तकों के चरणबद्ध बदलाव का हिस्सा है।
इस तरह कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान में अब इतिहास पढ़ाने का फोकस पहले की तुलना में अधिक भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय शक्तियों, सांस्कृतिक परंपराओं और प्रतिरोध की घटनाओं पर दिखाई देता है।