इंडिगो ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज, कल से महंगा होगा हवाई सफर

नई दिल्ली 05 October 2026 : देश की सबसे बड़ी किफायती विमानन कंपनी इंडिगो ने अपने सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूटों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की घोषणा की है. विमानन कंपनी ने इस बढ़ोतरी के पीछे एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई ईंधन की कीमतों में आई भारी तेजी को मुख्य वजह बताया है. कंपनी के अनुसार, लगातार बढ़ते खर्चों के कारण उनका परिचालन घाटा बढ़ रहा था, जिसके चलते यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था.

6 अक्टूबर, 2026 से लागू होंगी नई दरें

इंडिगो द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, संशोधित फ्यूल सरचार्ज की दरें 6 अक्टूबर, 2026 रात 12:01 बजे से होने वाली सभी नई टिकट बुकिंग पर प्रभावी होंगी. हालांकि, जिन यात्रियों ने 6 अक्टूबर से पहले अपनी टिकट बुक करा ली है, उन पर इस मूल्य वृद्धि का कोई असर नहीं पड़ेगा और वे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यात्रा कर सकेंगे.

14% से अधिक महंगा हुआ हवाई ईंधन

कंपनी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण हवाई ईंधन की दरें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. पिछले कुछ महीनों में ATF की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है, जिसमें ताजा महीने-दर-महीने (MoM) वृद्धि 14 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है. इस उछाल ने एटीएफ की लागत को पिछले एक दशक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है. किसी भी विमानन कंपनी के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 40% होती है, इसलिए इस बढ़ोतरी का सीधा असर एयरलाइन के पूरे नेटवर्क पर पड़ रहा है.

घरेलू रूटों पर यात्रा की दूरी के हिसाब से प्रति टिकट सरचार्ज की दरें तय की गई हैं, जो न्यूनतम ₹375 से शुरू होकर अधिकतम ₹1,300 तक जाती हैं:

500 किमी तक की दूरी: ₹375

501 किमी से 1,000 किमी: ₹600

1,001 किमी से 1,500 किमी: ₹900

1,501 किमी से 2,000 किमी: ₹1,150

2,000 किमी से अधिक की दूरी: ₹1,300

विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को गंतव्य देश और दूरी के आधार पर भारी सरचार्ज देना होगा, जो ₹1,000 से लेकर ₹6,000 प्रति सेक्टर तक तय किया गया है.

सार्क क्षेत्र (500 किमी तक): ₹1,000

सार्क क्षेत्र (500 किमी से अधिक): ₹3,000

दक्षिण-पूर्वी एशिया: ₹5,500

जीसीसी और मिडिल ईस्ट: ₹5,500

उत्तर और पूर्वी एशिया: ₹5,500

अफ्रीका और यूरोप : ₹6,000

इंडिगो ने स्पष्ट किया है कि ईंधन की बढ़ती लागत की पूरी भरपाई के लिए सरचार्ज में इससे कहीं अधिक बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन ग्राहकों को होने वाली असुविधा को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने यह एक सीमित और संतुलित कदम उठाया है ताकि आम यात्रियों पर इसका बहुत ज्यादा वित्तीय बोझ न पड़े