छत्तीसगढ़ प्रदेश सरपंच महासंघ प्रदेश स्तरीय सरपंच सम्मेलन, पांच सूत्रीय मांगों पर महासंघ का बड़ा निर्णय: शासन को एक माह का समय, मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

योगेश यादव/रायपुर, 8 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ प्रदेश सरपंच महासंघ के तत्वावधान में प्रदेश अध्यक्ष श्री कपिल देव नायक के नेतृत्व में श्री सत्य साईं ऑडिटोरियम, नया रायपुर में प्रदेश स्तरीय सरपंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों, विकासखंडों एवं ग्राम पंचायतों से आए सरपंचों, जिला अध्यक्षों, विकासखंड अध्यक्षों तथा महासंघ के पदाधिकारियों ने भाग लेकर पंचायतों के अधिकारों, ग्रामीण विकास और सरपंचों की समस्याओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

 

इस सम्मेलन में श्री रघुवीर अग्रवाल, श्री लखन पटेल, श्री पिंटू सिन्हा, श्री युगल किशोर साहू, श्रीमती राजेश्वरी कैलाश आदिल, श्री तरुण माणिकपुरी, श्री संकेत अग्रवाल सहित अनेक पदाधिकारियों का सहयोग एवं सहभागिता रही।

 

पांच सूत्रीय मांगों पर सर्वसम्मति से निर्णय

 

सम्मेलन में पंचायतों की वित्तीय समस्याओं, मनरेगा के भुगतान, ग्राम पंचायतों के बिजली बिल, आवास योजना एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि महासंघ की पांच सूत्रीय मांगों को शासन के समक्ष प्रस्तुत कर उनके निराकरण के लिए एक माह का समय दिया जाएगा।

 

महासंघ ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित एक माह की अवधि में मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो प्रदेशभर के सरपंच संगठित होकर प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे। इसकी जिम्मेदारी संबंधित शासन-प्रशासन की होगी।

 

महासंघ की प्रमुख मांगों में मनरेगा के अंतर्गत श्रमिकों एवं सामग्री के भुगतान की व्यवस्था को सरल बनाना, निर्धारित 60:40 अनुपात के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करना, ग्राम पंचायतों के बिजली बिल की मूलभूत राशि से कटौती बंद करना, पात्र हितग्राहियों के नाम आवास प्लस 2.0 में पुनः जोड़ना तथा वृद्धावस्था एवं निराश्रित पेंशन के मामलों में ग्रामसभा की भूमिका को प्रभावी बनाना शामिल है। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार प्रदान करने और जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर दिया गया।

 

प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे सरपंच एवं पदाधिकारी

 

सम्मेलन में बस्तर, कोंडागांव, सरगुजा, रायपुर, दुर्ग, महासमुंद, राजनांदगांव, कवर्धा, मुंगेली, गरियाबंद, पेमरा सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से सरपंच संघ के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

प्रमुख रूप से श्री खेमकुमार मारकंडे, श्री ललित यादव, श्री लखन पटेल, श्री पिंटू सिन्हा, श्री युगल किशोर साहू, श्री क्रांतिभूषण साहू, श्री शत्रुघ्न चेलक, श्री संत राम बर्मन, श्री हेमंत साहू तथा अनेक जिला एवं विकासखंड पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं और ग्राम पंचायतों के समक्ष उपस्थित चुनौतियों से अवगत कराया।

 

सम्मेलन में यह संकल्प व्यक्त किया गया कि ग्राम पंचायतों की समस्याओं को सामूहिक रूप से शासन के समक्ष रखा जाएगा तथा सरपंचों के अधिकारों, सम्मान और ग्रामीण जनता के हितों के लिए संगठनात्मक एकजुटता के साथ प्रयास जारी रखे जाएंगे।

 

इस पहल का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों, कौशल विकास कार्यक्रमों, महिला सशक्तीकरण तथा युवा सशक्तीकरण से संबंधित योजनाओं की जानकारी ग्राम स्तर तक पहुंचाना और पंचायतों को विकास की गतिविधियों से जोड़ना है। महासंघ ने सभी सरपंचों से इन प्रयासों में सहभागिता निभाने तथा ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

 

 

उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सरपंचों की सहभागिता पंचायतों के अधिकारों और ग्रामीण विकास के विषयों पर सामूहिक विचार-विमर्श के महत्व को दर्शाती है। महासंघ आगे भी ग्राम पंचायतों की समस्याओं को संगठित रूप से शासन के समक्ष प्रस्तुत करता रहेगा और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करेगा।

 

सम्मेलन का समापन सभी उपस्थित पदाधिकारियों एवं सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

 

महासंघ का संदेश:

“सशक्त सरपंच, सशक्त ग्राम पंचायत और आत्मनिर्भर गांव — यही छत्तीसगढ़ के समग्र विकास का आधार है।”