नई दिल्ली 23 अक्टूबर 2026 : भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने अपनी युद्ध तैयारियों को तेज कर दिया है। बल ने ‘शौर्य कमांडो’ नाम से एक नई लड़ाकू इकाई तैयार की है। आईटीबीपी प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर के मुताबिक, इन कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ गतिरोध के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। इसके साथ ही बल ड्रोन तकनीक, विशेष सैन्य प्रशिक्षण और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी काम कर रहा है।
हर बॉर्डर बटालियन में तैनात होंगे शौर्य कमांडो
आईटीबीपी प्रमुख ने बताया कि चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सुरक्षा और युद्ध तैयारियों को मजबूत करने की योजना के तहत हर बॉर्डर बटालियन में शौर्य कमांडो तैनात किए जाएंगे। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा की लंबाई लगभग 3,488 किलोमीटर है।
आईटीबीपी अपने जवानों को बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुसार तैयार कर रही है। इसके तहत पारंपरिक युद्ध रणनीतियों के साथ आधुनिक तकनीक और विशेष सैन्य प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है।
ड्रोन वॉरफेयर के लिए मिले 400 करोड़ रुपये
आईटीबीपी ने अपनी सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून गठित किए हैं। जवानों को ड्रोन संचालन और इस तकनीक के इस्तेमाल से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
आईटीबीपी प्रमुख के अनुसार, बल को सरकार से 400 करोड़ रुपये की राशि मिली है। इसमें से 70 प्रतिशत राशि ड्रोन युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने आईटीबीपी की आधुनिकीकरण योजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इस योजना में ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।
आधुनिक तकनीक का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
गलवान घाटी जैसी परिस्थितियों के लिए विशेष ट्रेनिंग
आईटीबीपी ने जवानों को कठिन युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एक नया स्ट्राइक कोर्स भी तैयार किया है। इसका लक्ष्य जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए जवानों को प्रशिक्षित करना है।
आईटीबीपी प्रमुख के मुताबिक, वर्ष 2027 के अंत तक पूरी फोर्स को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। बाद में चीन ने भी अपने चार सैनिकों की मौत की पुष्टि की थी
