बिलासपुर 25 अक्टूबर 2026 : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के पूर्व आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी अभ्यर्थी को केवल इस आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता कि उसके शैक्षणिक प्रमाणपत्र जारी करने वाले बोर्ड की मान्यता बाद में निलंबित कर दी गई थी।
मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। इस फैसले को उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी शैक्षणिक योग्यता पर संबंधित बोर्ड की मान्यता को लेकर सवाल उठाए गए थे।
केंद्र सरकार की अपील हाईकोर्ट ने की खारिज
ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में अभ्यर्थी की पात्रता को लेकर विवाद सामने आया था। मामले में प्रमाणपत्र जारी करने वाले बोर्ड की मान्यता बाद में निलंबित किए जाने का मुद्दा उठाया गया। इसी आधार पर अभ्यर्थी की पात्रता पर सवाल खड़े हुए थे।
मामला केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण तक पहुंचा, जहां से अभ्यर्थी के पक्ष में आदेश पारित किया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने कैट के फैसले को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले पर विचार करने के बाद केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी और कैट के फैसले को बरकरार रखा।
बोर्ड की मान्यता बाद में निलंबित होना ही अयोग्यता का आधार नहीं
अदालत के फैसले का प्रमुख पहलू यह है कि किसी अभ्यर्थी की शैक्षणिक योग्यता का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि प्रमाणपत्र जारी करने वाले बोर्ड की मान्यता बाद में निलंबित हो गई।
भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की पात्रता निर्धारित नियमों और संबंधित परिस्थितियों के आधार पर तय की जानी चाहिए। बोर्ड की मान्यता से जुड़ी बाद की स्थिति को आधार बनाकर किसी उम्मीदवार को स्वतः अयोग्य मानना उचित नहीं होगा।
हालांकि, इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि सभी मामलों में ऐसे प्रमाणपत्र मान्य होंगे। प्रत्येक भर्ती में लागू नियमों, प्रमाणपत्र की स्थिति और संबंधित तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
ग्रामीण डाक सेवक भर्ती से जुड़ा है मामला
ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में शैक्षणिक योग्यता और दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में बोर्ड की मान्यता को लेकर विवाद होने पर अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से संबंधित मामले में अभ्यर्थी को राहत मिली है। साथ ही, यह निर्णय भर्ती से जुड़े विवादों में तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर निष्पक्ष मूल्यांकन के महत्व को भी रेखांकित करता है।
