नई दिल्ली 27 अक्टूबर 2026 : हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में साहस, आत्मविश्वास तथा सकारात्मकता का संचार होता है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा की प्रत्येक चौपाई भगवान हनुमान के गुणों और आदर्शों का संदेश देती है। इन्हीं में एक प्रसिद्ध चौपाई है—‘विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर।’ यह चौपाई ज्ञान, गुण, कार्यकुशलता और समर्पण का महत्व बताती है।
हनुमान चालीसा की कौन-सी चौपाई है खास?
हनुमान चालीसा की यह चौपाई भगवान हनुमान के व्यक्तित्व और उनके जीवन के आदर्शों को दर्शाती है।
विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
इस चौपाई में हनुमान जी को विद्वान, गुणवान और अत्यंत बुद्धिमान बताया गया है। साथ ही, भगवान श्रीराम के कार्यों को पूरा करने के प्रति उनकी तत्परता और समर्पण का वर्णन किया गया है।
‘विद्यावान गुणी अति चातुर’ का क्या है अर्थ?
इस चौपाई की पहली पंक्ति में हनुमान जी के ज्ञान, अच्छे गुणों और बुद्धिमत्ता का वर्णन मिलता है।
- विद्यावान: हनुमान जी ज्ञान और विद्या के भंडार हैं। यह शब्द शिक्षा और ज्ञान के महत्व को दर्शाता है।
- गुणी: हनुमान जी साहस, विनम्रता, विवेक और सेवाभाव जैसे श्रेष्ठ गुणों के प्रतीक हैं।
- अति चातुर: इसका अर्थ अत्यंत बुद्धिमान, विवेकशील और कार्यकुशल होना है। हनुमान जी कठिन परिस्थितियों में भी अपनी बुद्धि से उचित मार्ग निकालते हैं।
यह पंक्ति सिखाती है कि केवल ज्ञान प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही उपयोग करना और अपने व्यवहार में अच्छे गुणों को अपनाना भी जरूरी है।
‘राम काज करिबे को आतुर’ का गहरा संदेश
चौपाई की दूसरी पंक्ति में भगवान श्रीराम के कार्यों को पूरा करने के लिए हनुमान जी की तत्परता का वर्णन किया गया है। हनुमान जी अपनी शक्ति, ज्ञान और बुद्धिमत्ता का उपयोग भगवान श्रीराम की सेवा में करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी का चरित्र निस्वार्थ सेवा, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण का आदर्श है। यह पंक्ति बताती है कि किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए केवल योग्यता होना काफी नहीं है, बल्कि सही समय पर प्रयास करना और जिम्मेदारी निभाना भी आवश्यक है।
