सेहत 30 अक्टूबर 2026 : वॉक करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। ये वजन कम करने के साथ साथ शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। लेकिन एक सवाल जो लाखों के मन में रहता है वो है कि क्या वॉक करने से ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
वॉक करना ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के सबसे आसान और प्रभावी तरीकों में से एक है। जब हम चलते हैं, तो हमारी मांसपेशियों को काम करने के लिए एनर्जी की जरूरत होती है। इसके लिए शरीर खून में मौजूद ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है, जिससे ब्लड शुगर का लेवल कम करने में मदद मिलती है। नियमित रूप से चलने से शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता भी बेहतर होती है। इसका मतलब है कि शरीर इंसुलिन का इस्तेमाल अधिक प्रभावी ढंग से कर पाता है और ग्लूकोज को खून से कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
वॉक करने का सही समय क्या है?
जहां तक वॉक करने के सही समय की बात है, तो खाने के बाद टहलना फायदेमंद हो सकता है। लंच या डिनर के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की या मध्यम गति से वॉक करने से भोजन के बाद बढ़ने वाले ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर डिनर के बाद टहलना उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन है जो दिनभर ज्यादातर समय बैठे रहते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सुबह की वॉक फायदेमंद नहीं है। सुबह की वॉक भी हार्ट हेल्थ, वजन कंट्रोल करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद करती है।
डॉक्टर की माने तो एक बार में बहुत देर तक चलने के बजाय दिनभर अपनी गतिविधियों को बनाए रखें। शुरुआत 10 से 15 मिनट की वॉक से की जा सकती है और धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखना चाहिए। डायबिटीज से पीड़ित लोगों को अपनी वॉक की दिनचर्या बनाते समय कुछ सावधानियां भी रखनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इंसुलिन या ऐसी दवाएं ले रहा है जिनसे ब्लड शुगर कम हो सकता है, तो उसे वॉक के दौरान हाइपोग्लाइसीमिया यानी शुगर बहुत कम होने के जोखिम का ध्यान रखना चाहिए। यह समझना जरूरी है कि वॉक दवाओं और संतुलित खान-पान का विकल्प नहीं है, बल्कि ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने में उनकी मदद करने वाली एक अच्छी आदत है।
