Quad में भारत का बढ़ा मान! नेपाल बाढ़ राहत अभियान की तारीफ, समुद्री सुरक्षा पर बनी सहमति

नई दिल्ली: 01नवंबर 2026 : क्वाड  देशों ने नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के दौरान भारत की त्वरित राहत और बचाव सहायता की सराहना की है। अमेरिका के अटलांटा में 31 अक्टूबर 2026 को हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में चीन का नाम लिए बिना उसकी व्यापार नीतियों और मनमाने निर्यात प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई गई। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

नेपाल बाढ़ में भारत की मदद की Quad ने की सराहना

क्वाड देशों ने संयुक्त बयान में नेपाल में बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों के दौरान भारत की सक्रिय भूमिका की सराहना की। भारत ने आपदा के समय नेपाल को जरूरी राहत उपकरणों के साथ वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई थी।

क्वाड की इस सराहना को आपदा प्रबंधन और पड़ोसी देशों की मदद के क्षेत्र में भारत के योगदान की अहम पहचान माना जा रहा है। बैठक में अन्य क्वाड देशों की ओर से नेपाल को दिए गए सहयोग का भी उल्लेख किया गया।

चीन की व्यापार नीतियों पर Quad ने जताई चिंता

क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक व्यापार में आर्थिक दबाव बनाने वाली नीतियों और मनमाने निर्यात प्रतिबंधों पर गंभीर चिंता जताई। संयुक्त बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इन टिप्पणियों को चीन की व्यापार नीतियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

बयान के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा उत्पादन, अनुचित व्यापारिक नीतियां और निर्यात पर मनमाने प्रतिबंध वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं। इससे महत्वपूर्ण उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है।

क्वाड देशों ने भरोसेमंद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने, आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने और महत्वपूर्ण उद्योगों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

होर्मुज और लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा पर जोर

बैठक में पश्चिम एशिया के तनाव और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। क्वाड देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इन समुद्री मार्गों का वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान है। इन रास्तों पर किसी भी तरह की बाधा से तेल, ईंधन और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

क्वाड ने जहाजों और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की बात कही। साथ ही, जहाजों की आवाजाही पर अनुचित प्रतिबंधों और टोल जैसी बाधाओं से बचने पर भी जोर दिया गया।

एस. जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर क्या कहा?

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने को अहम बताया।

जयशंकर के मुताबिक, क्वाड देशों के बीच सहयोग का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना और सभी देशों की स्वतंत्र रूप से फैसले लेने की क्षमता को बनाए रखना है। उन्होंने आतंकवाद से मुकाबले, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय देशों की क्षमताएं बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत भी बताई।

अटलांटा में इस साल हुई क्वाड की तीसरी बैठक

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि अटलांटा में हुई यह बैठक वर्ष 2026 में क्वाड विदेश मंत्रियों की तीसरी बैठक थी। इससे पहले नई दिल्ली और मनीला में भी बैठकें आयोजित की गई थीं।

बैठक में चारों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि के साथ तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर चर्चा की।

G20 बैठक में भी समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठा

क्वाड बैठक से एक दिन पहले G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में भी समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था। एस. जयशंकर ने नागरिक जहाजों और उनके कर्मचारियों पर होने वाले हमलों को लेकर चिंता जताई थी।

उन्होंने कहा था कि समुद्री मार्गों पर हमलों से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही प्रभावित होती है। इसका असर विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ सकता है, क्योंकि समुद्री व्यापार में बाधा आने से ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने के साथ उनकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

 

इस तरह क्वाड की बैठक में भारत की क्षेत्रीय भूमिका की सराहना के साथ आर्थिक सुरक्षा, चीन की व्यापार नीतियों और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए।